शुक्रवार, 27 मई 2022

खुशियों..!

खुशियों अबकी घर आना तो साथ बहाने मत लाना
थोड़ा सा मरहम ले आना, जख़्म पुराने मत लाना

चश्मा, चप्पल, फ़ोन, चार्जर और दवाई रख लेना
सिगरेट की डिब्बी ले आना, मीठे दाने मत लाना

मेमोरी  में   भरवा  लेना  गीत  पुराने  'सत्तर'  के
'गिरिजा' की ठुमरी ले आना, ताजे गाने मत लाना

बिना सूद के मिल जाएं तो थोड़े पैसे ले आना
अपना मिले उसी से लेना, सबके ताने मत लाना

साँझ भये छत पर टहलेंगे, बात करेंगे, रोयेंगे
अबकी बार ठहर कर जाना, पाँव फिराने मत आना

साथ न लेकर आना कोई झंझट इश्क़ मुहब्बत का 
कड़वा सच ले आना लेकिन ख़्वाब सुहाने मत लाना

मत कोई उम्मीदें लाना उनसे दिक्कत बढ़ती है
सब 'आनंद' लुटा जाना अब नए फ़साने मत लाना ।

© आनंद 

मंगलवार, 10 मई 2022

जिंदगी

रंग क्या-क्या दिखाती रही उम्र भर
जिंदगी कुछ सिखाती रही उम्र भर 

एक मिसरा ग़ज़ल का नहीं बन सकी
जाने क्या बुदबुदाती रही उम्र भर 

जिस जगह से मैं भागा उसी बिंदु पर
मुझको लेकर के आती रही उम्र भर 

इश्क़ की राह को मन मचलता कभी 
मुझको रोटी पे लाती रही उम्र भर 

मेरे माथे पे संघर्ष गोदवा दिया
फिर मुझे आजमाती रही उम्र भर 

जख़्म रिसते रहे दर्द बहता रहा
जिंदगी छटपटाती रही उम्र भर 

मैं बुरा था बुरा ही रहा हर कदम
ये हक़ीकत छिपाती रही उम्र भर 

एक टुकड़ा खुशी का नहीं दे सकी
बस पहाड़े पढ़ाती रही उम्र भर

नाम 'आनंद' था सो मेरे नाम की
रोज खिल्ली उड़ाती रही उम्र भर। 

© आनंद