जैसे पानी का एक बुलबुला ....
सपना तो
बिलकुल भी नहीं था
था तो हकीकत ही ...
मगर
इन कमबख्त बुलबुलों की
उम्र ही कितनी होती है
कुछ तो आवाज़ भी नहीं करते ....
मेरा प्यार....
खामोश बुलबुला तो नहीं था न ?
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लगता ही नही
मैंने
जन्नत नही देखी
याकि मैं
इस धरती का
रहने वाला हूँ,
तुमको पाकर
लगता ही नही
कि
मुझमे कुछ कमी है !
आनन्द द्विवेदी १३-१४/०७/२०११


