रविवार, 15 फ़रवरी 2026

कहीं और चला जा

 

मत कर नया समर, तू कहीं और चला जा

अब छोड़ ये डगर तू कहीं और चला जा।


जो ज़ख़्म पे मरहम हो, शफ़ा हो शुकून हो 

ये वो नहीं है घर, तू कहीं और चला जा।


खुदगर्ज़ बस्तियों में फ़रेबों के मकाँ हैं 

'उनका' है ये शहर तू कहीं और चला जा।


सबसे बड़ा फ़रेब है ख़ुद ज़िंदगी यहाँ 

फिर भी ग़िला न कर, तू कहीं और चला जा।


उनका हुआ तो उनका ही हो जा रे आदमी 

मत कर इधर उधर, तू कहीं और चला जा।


ये ख़्वाब-ओ-हक़ीकत, ये फ़साने, ये फ़लसफे 

अब यार बस भी कर, तू कहीं और चला जा।


आराम भी, सुकून भी, इज़्ज़त भी, इश्क़ भी 

इतना न तंग कर, तू कहीं और चला जा।


'आनंद' का कुछ हाल तो मालूम ही होगा 

न ज़र न घर न दर, तू कहीं और चला जा।




©आनंद

15 फरवरी 2026.

एक बेटा उदास है
कि उसकी माँ
हो गयी है जोगन
कि उसने कह दिया है कि वह अब संसार के बंधनों से मुक्त है
कि साक्षात शिव ने वर लिया है उसे
मगर बेटा फिर भी उदास है
महाकाल के क्रोध से नहीं भयभीत बालक
उसे इतना तो पता है कि हाथी का ना सही
किसी न किसी जीव का सर
तो मिल ही जायेगा उसके धड़ के लिए
वो उदास है कि कहीं शिव के प्रेम में जोगन बनी माँ
ये भूल ही न जाए
कि अपने बच्चे के लिए उसकी एक जिद
कितनी जरूरी है
बच्चे के जीवन के लिए !
__________________ (हैप्पी बर्थडे मम्मा )