शनिवार, 23 मार्च 2013

तुमने गज़ाले मार दिए उस मचान से

जिसकी वजह से लोग गए अपनी जान से
वो तीर चला ही नहीं उसकी कमान से

मरता नहीं है कोई किसी के लिये यहाँ
उसने कही ये बात  बड़े  इत्मिनान से

अच्छा है तू किसी का तलबग़ार न रहे 
मैंने भी दुआ माँग ली धीमी ज़बान से

अक्सर बड़े लिहाज़ से उसने सुना मुझे
वो पल, रहे हैं उसके लिए इम्तिहान से 

शेरों के लिए जिसको बनाया था एक दिन
तुमने गज़ाले मार दिए उस मचान से

डर है कहीं 'आनंद' न खो जाए आपसे
ये शै नहीं मिलेगी किसी भी दुकान से

- आनंद


7 टिप्‍पणियां:

  1. सही कहा आपने .......कोई नहीं मरता यहाँ किसी के वास्ते


    जब तिल तिल के मर रहें है हम अपने आप से ...

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  2. आपकी यह बेहतरीन रचना बुधवार 27/03/2013 को http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर लिंक की जाएगी. कृपया अवलोकन करे एवं आपके सुझावों को अंकित करें, लिंक में आपका स्वागत है . धन्यवाद!

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  4. बहुत खूब .सुन्दर प्रस्तुति. आपको होली की हार्दिक शुभ कामना .



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  5. theek bat,kaun marta hae kiske liye,apni maut hi marna hota hae har kisi ko

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  6. बहुत खूब लिखा आपनें और सही बात है कौन किसके लिए मरेगा खुद के लिए जीने से ही फुर्सत नहीं हैं.

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