मंगलवार, 1 नवम्बर 2011

हर सांस तेरा नाम ....



हर सांस तेरा नाम लिए जा रहा हूँ मैं
सारे हसींन ख्वाब जिए जा रहा हूँ मैं !!


तू मुझको संभाले ना संभाले तेरी मर्ज़ी ,
इतना तो होश है की पिए जा रहा हूँ मैं !

मूरत पे हक़ किसी का, पर 'श्याम' तो मेरा,
कुछ इस तरह से प्यार किये जा रहा हूँ मैं !

कातिल ने इस दफा भी मेरी जान बक्स दी ,
अब इस अदा पे जान दिए जा रहा हूँ मैं !


जाऊं जहाँ भी मैं वो जगह तेरा दर लगे ,
इतना तो तुझे साथ लिए जा रहा हूँ मैं !

दिल में तेरे रहूँ ,भला इसकी भी फिक्र क्या
'आनंद' तेरे नाम किये जा रहा हूँ मैं   !



आनंद द्विवेदी -  ०१/११/२०११

20 टिप्पणियाँ:

  1. मूरत है किसी और की पर 'श्याम' तो मेरा,
    कुछ इस तरह से प्यार किये जा रहा हूँ मैं !
    Behad sundar!

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  2. कातिल ने इस दफा भी मेरी जान बक्स दी ,
    अब इस अदा पे जान दिए जा रहा हूँ मैं !
    वाह क्या बात है ..खूबसूरत गज़ल

    बक्स -- बख्श

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  3. "कातिल ने इस दफा भी मेरी जान बक्स दी ,
    अब इस अदा पे जान दिए जा रहा हूँ मैं !"

    बेहतरीन प्रस्‍तुति....!!

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  4. जाऊं जहाँ भी मैं वो जगह तेरा दर लगे ,
    इतना तो तुझे साथ लिए जा रहा हूँ मैं !बेहतरीन!!

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  5. जाऊं जहाँ भी मैं वो जगह तेरा दर लगे ,
    इतना तो तुझे साथ लिए जा रहा हूँ मैं !
    वाह ...बहुत खूब लिखा है ।

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  6. आपकी किसी नयी -पुरानी पोस्ट की हल चल कल 3 - 11 - 2011 को यहाँ भी है

    ...नयी पुरानी हलचल में आज ...

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  7. जाऊं जहाँ भी मैं वो जगह तेरा दर लगे ,
    इतना तो तुझे साथ लिए जा रहा हूँ मैं !
    बहुत खुबसूरत ....

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  8. जाऊं जहाँ भी मैं वो जगह तेरा दर लगे ,
    इतना तो तुझे साथ लिए जा रहा हूँ मैं !..

    वाह क्या लाजवाब शेर हैं इस कमाल की गज़ल में .. ये तो बहत पसंद आया ...

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  9. जाऊं जहाँ भी मैं वो जगह तेरा दर लगे ,
    इतना तो तुझे साथ लिए जा रहा हूँ मैं !
    बेहतरीन!

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  10. •आपकी किसी पोस्ट की हलचल है ...कल शनिवार (५-११-११)को नयी-पुरानी हलचल पर ......कृपया पधारें और अपने अमूल्य विचार ज़रूर दें .....!!!धन्यवाद.

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  11. हर सांस तेरा नाम लिए जा रहा हूँ मैं
    सारे हसींन ख्वाब जिए जा रहा हूँ मैं !!behtreen prem bhaavabhivaykti....

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  12. जाऊं जहाँ भी मैं वो जगह तेरा दर लगे ,
    इतना तो तुझे साथ लिए जा रहा हूँ मैं !
    बहुत खूब!

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  13. शायरेआज़म प्रियवर आनंद द्विवेदी जी
    सस्नेहाभिवादन !

    कातिल ने इस दफा भी मेरी जान बख़्स दी ,
    अब इस अदा पे जान दिए जा रहा हूं मैं !

    कलेजा निकाल दिया इस शे'र ने …
    क्या बात है जनाब !

    बधाई और मंगलकामनाओं सहित…
    - राजेन्द्र स्वर्णकार

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  14. मूरत पे हक़ किसी का, पर 'श्याम' तो मेरा,
    कुछ इस तरह से प्यार किये जा रहा हूँ मैं !
    बहुत सुन्दर समर्पण भरे भाव...

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  15. मूरत पे हक़ किसी का, पर 'श्याम' तो मेरा,
    कुछ इस तरह से प्यार किये जा रहा हूँ मैं !……………बहुत सुन्दर भाव संयोजन्।

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