सोमवार, 25 मार्च 2013

होली है माधव !



कहाँ लगाऊं अबीर ..
कहाँ से रंगू तुमको 

अब मुझसे ..
ये भी नहीं होगा 
मेरा संकोच... मेरा दुश्मन बन बैठा है 
इससे पहले कि मैं 
तुझे आंसुओं से ही नहला दूँ
होली मुबारक हो चितचोर !!
जाओ
बरसानेवाली के रंग में रंगे हो तुम
पहले से ही,
ऐसे में
मैं क्या और मेरा रंग क्या
पर मैं भी ना
सारी उम्र ..ऐसे ही
अबीर लिए
खड़ा रहूँगा
ध्यान रखना
रंगना तुम्हें ही पड़ेगा !

- आनंद  

3 टिप्‍पणियां:

  1. कहते है होली के रंगों में हर रंग छिप जाता है ...अपने कान्हा से ये अनबूझी...कहा-सुनी कब तक चलेगी :)

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  2. बहुत सराहनीय प्रस्तुति.बहुत सुंदर बात कही है इन पंक्तियों में. दिल को छू गयी. आभार !

    ले के हाथ हाथों में, दिल से दिल मिला लो आज
    यारों कब मिले मौका अब छोड़ों ना कि होली है.

    मौसम आज रंगों का , छायी अब खुमारी है
    चलों सब एक रंग में हो कि आयी आज होली है

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  3. सुंदर भावपूर्ण सहजता से कही गयी गहरी बात
    बहुत बहुत बधाई
    होली की शुभकामनायें

    aagrah hai mere blog main bhi sammlit ho
    aabhar




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