बुधवार, 1 फ़रवरी 2012

ऐसा मुमकिन कम है ..................यादें बस यादें.... जो है नितांत अपनी !!



हो सकता है कभी याद तुमको आजाऊं 
ऐसा मुमकिन कम है लेकिन हो सकता है

हो सकता है कभी उन्हीं राहों से गुजरो
हो सकता है उस नदिया तक फिर जाना हो
हो सकता है साजन तेरा मिलने आये
हो सकता है उस बगिया तक फिर जाना हो
हो सकता है फिर से वो चिड़ियों का जोड़ा
देखे तुमको आँखों में कुछ विस्मय भरकर
हो सकता है गीत वही फिर टकरा जाएँ
डूब गये थे हम गहरे जिन को सुन सुन कर

पल भर को चितवन में बस मैं ही छा जाऊं 
ऐसा मुमकिन कम है लेकिन हो सकता है

हो सकता है फिर से वही चांदनी छाये
हो सकता है नौका में बैठो फिर से तुम
हो सकता रिमझिम सावन फिर से बरसे
बहती धारा में मुमकिन पैठो फिर से तुम
तेरे बालों की  मेहँदी की खुशबू शायद
हो सकता है कभी किसी को पागल करदे
गोरे गोरे पांव चूम ले कोई शायद
बस इतनी सी बात नयन में बादल भर दे

तुम फिर गाओ गीत और मैं सुन भी पाऊं
ऐसा मुमकिन कम है लेकिन हो सकता है !!

आनंद द्विवेदी
१० जनवरी २०१२


26 टिप्‍पणियां:

  1. बिलकुल हो सकता है...

    बहुत भावभीनी रचना..

    सादर.

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  2. आजकल ,आपने रुलाने का ठेका ले रखा है क्या?बहुत सुन्दर.....आँखें नम हो गयीं.

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    1. रुलाते तो आप हो निधि मैं तो आंसू सूख जाने कि जुगत में हूँ.

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  3. जिंदगी में जो होता हैं वो बिन सोचे ही होता हैं ....
    कभी भी कुछ भी हो सकता हैं ......

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  4. संभावनाओं का आकाश बहुत ऊँचा होता है...
    सब कुछ संभव है...!

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    1. तुम फिर गाओ गीत और मैं सुन भी पाऊं
      ऐसा मुमकिन कम है लेकिन हो सकता है !!
      Bhahut bhavuk!

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  5. बहुत खुबसूरत रचना अभिवयक्ति.........

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  6. हो सकता है सब कुछ हो सकता ... बहुत सुन्दर भाव...

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  7. हो सकता है .... सच में हो न हो ...यादों में तो हो ही सकता है / वाह आनद जी अच्छी सोच

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  8. तेरे बालों की मेहँदी की खुशबू शायद
    हो सकता है कभी किसी को पागल करदे
    गोरे गोरे पांव चूम ले कोई शायद
    बस इतनी सी बात नयन में बादल भर दे


    तुम फिर गाओ गीत और मैं सुन भी पाऊं
    ऐसा मुमकिन कम है लेकिन हो सकता है !!

    सब कुछ possible है इस जिंदगी में....
    होना भी.....
    न होना भी.....!
    लेकिन उसे हम किस तरह लेते हैं ये अपने हाथ में है......!!
    इसलिए.....
    be positive.......!!!

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    1. केवल पाजिटिव होने से हो सकता तो .... खैर छोड़ो.... मुझे सूरज चाहिए ...और मैं इतना पाजिटिव हूँ कि बस सूरज को छूने ही वाला हूँ
      मगर .....

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    2. अगर-मगर कुछ नहीं
      बस......

      "तथास्तु.............."

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  9. उम्मीद पर दुनिया कायम है..बिलकुल हो सकता है ..आमीन.सुन्दर कविता.

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  10. हो सकता है आनंद शाहब " नथिंग इम्पोसिबल " आगे बढिए तो सही |
    ----------------------------------------------------
    दो कदम हमने बढाया, साथ आपका मिला |
    ये मिलन ही बन गया, कामयाबियों का सिलसिला ||
    -----------------------------------------------------
    धन्यवाद |

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  11. जहां चाह वहाँ रहा सब कुछ हो सकता है। सुंदर कविता ... http://aapki-pasand.blogspot.com/2012/02/blog-post_03.html

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  12. वाह! बहुत खूबसूरत नज़्म है आदरणीय आनंद भाई...

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    1. मिश्रा जी आपका आगमन मन को खुश कर गया ..आभार !

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  13. आप सभी मित्रों को दिल से शुक्रिया !!

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  14. इतनी इतनी बातें कह दीं
    इतने इतने लोगों ने
    अपना कुछ कहना न कहना
    बेमानी सा लगता है

    सजा हुआ पलकों पे मोती
    मैला पानी लगता है

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  15. प्रिय सतीश भैया ..और जैरथ जी आभार आपका !

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