सुख दुःख से उबरेगी रे
तब रंगत निखरेगी रे
दुलहन नैहर आई तो है
कितने दिन ठहरेगी रे
पिय की भुवनमोहिनी चितवन
दिल में कब उतरेगी रे
छह रूपों वाली इक सौतन
घर से कब निकरेगी रे
सबसे दिल की कह देने की
आदत कब सुधरेगी रे
मतलब के हर रिश्ते वाली
दुनिया कब बिसरेगी रे
सारे दाँव लगे हैं जिस पर
काया यहीं जरेगी रे
ये आनंद नहीं, नाटक है
नटिनी खेल करेगी रे
सब छूटेगा, जिस दिन डोली
पिय के घर उतरेगी रे ।।
© आनंद द्विवेदी
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