शनिवार, 11 मई 2013

माँ

बावरी हुई है मातु प्रेम प्रेम बोलि रही
तीन लोक डोलि डोलि खुद को थकायो है
गायो नाचि नाचि कै हिये की पीर बार बार
प्रेम पंथ मुझ से कपूत को दिखायो है 

भसम रमाये एकु जोगिया दिखाय गयो
कछु न सुहाय हाय जग ही भुलायो है
धाय धाय चढ़त अटारी महतारी मोरि
छोड़ि लोक लाज सभी काज बिसरायो है

पायो है महेश अंश दंश सभी दूरि भये
धूरि करि चित्त के विकार दिखलायो है
भूरि भूरि करत प्रसंशा जगवाले तासु
मातु ने आनंद को आनंद से मिलायो है

- आनंद 

14 टिप्‍पणियां:

  1. वैसे तो हर दिन माँ का है ...पर माँ के दिवस पर हर माँ को नमन

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  2. बहुत सुन्दर...मातृ दिवस की हार्दिक शुभकामनायें!

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  3. आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा आज रविवार (12-05-2013) के चर्चा मंच 1242 पर लिंक की गई है कृपया पधारें. सूचनार्थ

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  4. मातृ दिवस सुन्दर प्रस्तुति
    दिवस विशेष भी हार्दिक शुभकामनाएँ....

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  5. बहुत बढ़िया लिखा है आपने, मातृ दिवस की शुभकामनाएं

    अनुशरण कर मेरे ब्लॉग को अनुभव करे मेरी अनुभूति को
    latest post हे ! भारत के मातायों
    latest postअनुभूति : क्षणिकाएं

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  6. ब्लॉग बुलेटिन के माँ दिवस विशेषांक माँ संवेदना है - वन्दे-मातरम् - ब्लॉग बुलेटिन मे आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

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  7. माँ को श्रद्धेय नमन।

    सादर

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  8. माँ को श्रद्धेय नमन।

    सादर

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