तेरी याद चली आयी या मौसम की शैतानी है
ऐसा क्यों लगता है जैसे फिर से शाम सुहानी है
तेरी यादों की दुनिया भी जालिम तेरे जैसी है
पल भर में अपनी लगती है पल भर में बेगानी है
तेरे पिंजरे का ये पंक्षी कब का उड़ना भूल गया
धड़कन तो चलती रहनी है जब तक दाना पानी है
तेरी जिन राहों पर मैंने बंदनवार सजाये थे
वो राहें तेरे क़दमों की आज तलक दीवानी हैं
तुझको यादों में आना हो या फिर आँख छलकना हो
मेरे साथ हमेशा सब की चल जाती मनमानी है
या तेरी यादों में डूबूं या जमुना में डूब मरूं
जोड़-घटाकर मेरे हिस्से दो ही बातें आनी हैं
मेरी आती-जाती सांसें पिया मिलन में बाधक हैं
सोंच रहा हूँ आखिर कैसे ये दीवार गिरानी है
कल 'आनंद' मिला था मुझको गुमसुम खोया-खोया सा
कुछ पूछो तो हंस पड़ता है, पर आँखों में पानी है
- आनंद द्विवेदी १६-०१-२०१२

तेरी जिन राहों पर मैंने बंदनवार सजाये थे
प्रत्युत्तर देंहटाएंवो राहें तेरे क़दमों की आज तलक दीवानी हैं.. बेहतरीन शेर।
कल 'आनंद' मिला था मुझको गुमसुम खोया-खोया सा
प्रत्युत्तर देंहटाएंकुछ पूछो तो हंस पड़ता है, बस आँखों में पानी है poori yaadon ka nichod hai
तेरे पिंजरे का ये पंक्षी कब का उड़ना भूल गया
प्रत्युत्तर देंहटाएंधड़कन तो चलती रहनी है जब तक दाना पानी है
कल 'आनंद' मिला था मुझको गुमसुम खोया-खोया सा
कुछ पूछो तो हंस पड़ता है, बस आँखों में पानी है .
लाजबाब करती पंक्तियाँ.
तेरी जिन राहों पर मैंने बंदनवार सजाये थे
प्रत्युत्तर देंहटाएंवो राहें तेरे क़दमों की आज तलक दीवानी हैं
तुझको यादों में आना हो या फिर आँख छलकना हो
मेरे साथ हमेशा सब की चल जाती मनमानी है
वाह ..बहुत खूब कहा है आपने ।
मकड़ी के जाले सा मन में उलझाव हैं
प्रत्युत्तर देंहटाएंबोझिल है अपनापन ,बौने से खुद के ख्याब हैं ||...अनु
....लाज़वाब..हरेक शेर बहुत उम्दा और ज़िंदगी की सची तस्वीर उकेरता हुआ...बहुत सुन्दर गज़ल
प्रत्युत्तर देंहटाएंAakhri wala sher awesome.
प्रत्युत्तर देंहटाएंSidhe dil mein utar gaya.
Bahut sunder ghazal.
लाज़वाब....उम्दा गज़ल.
प्रत्युत्तर देंहटाएंvikram7: महाशून्य से व्याह रचायें......
तेरे पिंजरे का ये पंक्षी कब का उड़ना भूल गया
हटाएंधड़कन तो चलती रहनी है जब तक दाना पानी है
तेरी जिन राहों पर मैंने बंदनवार सजाये थे
वो राहें तेरे क़दमों की आज तलक दीवानी हैं
Bahut sundar!
लाज़वाब पंक्तियाँ....
प्रत्युत्तर देंहटाएंVaah ... Lajawab. Gazal hai .... Har sher umda ..
प्रत्युत्तर देंहटाएंकल 'आनंद' मिला था मुझको गुमसुम खोया-खोया सा
प्रत्युत्तर देंहटाएंकुछ पूछो तो हंस पड़ता है, पर आँखों में पानी है
बहुत सुंदर...जब होंठों पर हँसी और आँखों में पानी हो तभी जीवन अपने रहस्योद्घाटन करता है
भावों से नाजुक शब्द......बेजोड़ भावाभियक्ति....
प्रत्युत्तर देंहटाएंसंगीता दीदी की टिप्पड़ी
प्रत्युत्तर देंहटाएंसंगीता स्वरुप ( गीत ) ने आपकी पोस्ट " आ पहुंचा हूँ ... " पर एक टिप्पणी छोड़ी है:
"मैं उसे खोजने निकला था सितारों कि तरफ
खोजता खोजता संसार तक आ पहुंचा हूँ "
बहुत खूब ...
वंदना गुप्ता जी कि टिप्पड़ी
प्रत्युत्तर देंहटाएंवन्दना ने आपकी पोस्ट " तेरी यादें ..... " पर एक टिप्पणी छोड़ी है:
बेहद उम्दा गज़ल्।
कल 'आनंद' मिला था मुझको गुमसुम खोया-खोया सा
प्रत्युत्तर देंहटाएंकुछ पूछो तो हंस पड़ता है, पर आँखों में पानी है
वाह....
बेहद खूबसूरत रचना...
बधाई.
तुझको यादों में आना हो या फिर आँख छलकना हो
प्रत्युत्तर देंहटाएंमेरे साथ हमेशा सब की चल जाती मनमानी है ...यही तो परेशानी है .....अपने मन की कभी चल ही नहीं पायी...जिसे चाहा उसके मन की मानी ...दूर हो कर भी ..आज तलक वो ही काबिज है दिल के हरेक फैसले में ...फिर चाहें उसे यादों में घुसपैठ करनी हो या आँखों से छलकना हो .
मेरी आती-जाती सांसें पिया मिलन में बाधक हैं
प्रत्युत्तर देंहटाएंसोंच रहा हूँ आखिर कैसे ये दीवार गिरानी है
कल 'आनंद' मिला था मुझको गुमसुम खोया-खोया सा
कुछ पूछो तो हंस पड़ता है, पर आँखों में पानी है .....waah! bahut hi sundr kavita,alg si soch....bdhai sweekaren...
कल 'आनंद' मिला था मुझको गुमसुम खोया-खोया सा
प्रत्युत्तर देंहटाएंकुछ पूछो तो हंस पड़ता है, पर आँखों में पानी है
बेहतरीन आनंद ....भावुक आनंद !