सोमवार, 6 नवंबर 2017

ये समझिये

हजारों रंग की मेरी कहानी, ये समझिये
पलों में ख़ार पल में गुल्फ़िशानी ये समझिये

शरारत ये बड़ी मासूम की है ख़ुशबुओं ने
रग़ों में बह चली है रातरानी ये समझिये

पड़ेगा वक़्त तो ये रतजगे सच बोल देंगे
हुए हैं ख़्वाब कैसे जाफ़रानी ये समझिये

बहारें भी यहाँ महफूज़ रहना जानती हैं
हुए हैं रंग सारे हुक्मरानी ये समझिये

जहाँ बच्चे लगाकर मास्क साँसे ले रहे हैं
हमारे देश की है राजधानी ये समझिये

अभी मैं डर रहा हूँ हर कदम राहों में तेरी
अभी सब याद हैं बातें पुरानी ये समझिये

कभी दो चार दिन आनंद के भी संग रहिये
कठिन संग्राम सी है जिंदगानी ये समझिये

© आनंद

4 टिप्‍पणियां:

  1. ब्लॉग बुलेटिन की आज की बुलेटिन, बुजुर्ग दम्पति, डाक्टर की राय और स्वर्ग की सुविधाएं “ , मे आप की पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

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  2. वाह ! बहुत खूब !
    डर की जगह धर लिखना चाहते थे शयद आप..

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