सोमवार, 11 मार्च 2013

उम्र भर इम्तिहान मत लेना

उम्र भर इम्तिहान मत लेना
बेवजह कोई जान मत लेना

जिसको दो पल न दे सको अपने 
उसका सारा जहान मत लेना

काट दो पंख कोई बात नहीं
हाँ मगर आसमान मत लेना

होश में आ गया है वो फिर से  
उसका कोई बयान मत लेना 

जिसकी आँखों में बेहयाई हो 
उससे कोई ज़ुबान मत लेना 

सारे 'आनंद' से मिलेंगे यहाँ
इस शहर में मकान मत लेना 

-आनंद 





8 टिप्‍पणियां:

  1. "इम्तहाँ लेते हैं वो मासूम बन बन के जनाब
    और कहते हैं भी ये...मैं इम्तहाँ लेता नहीं !!"

    बहुत खूब आनंद...
    आपकी शायरी की कायल हूँ मैं...!
    एक एक शेर उम्दा..
    हर एक शेर मुकम्मल...!!
    बधाई....!!!

    उत्तर देंहटाएं
  2. काट दो पंख....


    बहुत बढ़िया ग़ज़ल

    उत्तर देंहटाएं
  3. भावनाओ से ओत -पोत बहुत उम्दा प्रस्तुति आभार

    आज की मेरी नई रचना आपके विचारो के इंतजार में
    अर्ज सुनिये

    आप मेरे भी ब्लॉग का अनुसरण करे

    उत्तर देंहटाएं
  4. बहुत सुंदर और भावपूर्ण प्रस्तुतिकरण एक गहरे अर्थ के साथ, ----बधाई

    मेरे ब्लॉग में भी सम्मलित हों----आग्रह है
    jyoti-khare.blogspot.in







    उत्तर देंहटाएं
  5. वाह, जिसकी आँखों में बेहयाई हो, उससे कोई ज़ुबान मत लेना. बहुत खूब!

    उत्तर देंहटाएं
  6. बहुत खूब ... लाजवाब गज़ल ... सभी शेर अपनी अलग महक लिए ...

    उत्तर देंहटाएं
  7. Gahre bhao samete hue...satik maapdand,zindagi ke kisi raah pr chalne se pahle...

    उत्तर देंहटाएं