सोमवार, 11 मार्च 2013

झूठी दुनिया

अपना कह दूँ
तो तुझको अच्छा नहीं लगता
गैर कह के बुलाऊं
तो कलेज़ा मुँह को आता है
हरजाई कह दूँ
तो खुद को अच्छा नहीं लगता
बावफ़ा और बेवफ़ा
ऐसी बातों पर खुद ही यकीन नहीं
अब ले दे कर
ज़ालिम और निर्मोही बचता है
कैसे पुकारूँ तुझे

कैसे सुनेगा तू
दुश्मन !

झूठ बोलती है सारी दुनिया
कि दिल की आवाज़
दिल तक पहुँचती है !

- आनंद 

3 टिप्‍पणियां:

  1. पहुँचती है...
    ज़रूर पहुँचती है...!!
    बस आप सच्चे दिल से आवाज़ लगते रहें !!

    बहुत सुन्दर...
    हमेशा की तरह...!

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