शुक्रवार, 15 अप्रैल 2011

ठहरो चाँद ....!




बरसों बाद 
मेरी खिड़की  पर 
आज 
चाँद आकर ठहर गया है
हू-ब-हू  वही चाँद 
वही नाक नक्श, वही चांदनी 
बादलों की ओट में 
वही लुका छिपी  
वही शरारतें ..

इस बार नहीं जाने दूंगा ..
नहीं करूंगा 
रत्ती भर संकोच
बाँहों में भर लूँगा
हर कतरा
चांदनी....तुम्हारी!    

इतने दिन 
कहाँ थे तुम ?
तुम्हें 
मेरे गीत पसंद थे न  
देखो 
मैंने कितने गीत लिखे है
इनका हर लफ्ज़  
कितना तुम्हारा है 
आज सुनाऊंगा तुम्हें 
कम से कम 
एक गीत  मैं !

आज पूनम है 
खूब सारा वक़्त है न तुम्हारे पास 
अब से पहले 
न कभी 
ऐसी पूनम आई 
न कभी 
ऐसा वक़्त 
आज रुकोगे न तुम?
जल्दी मत करना 
आज ही 
जी लेनी है मुझे... 
अपनी सारी उम्र 
मुझे कल पर 
जरा भी ऐतबार नहीं !!

-आनंद द्विवेदी 
१५-०३-२०११

9 टिप्‍पणियां:

  1. आज ही
    जी लेनी है मुझे...
    अपनी सारी उम्र
    मुझे कल पर
    जरा भी ऐतबार नहीं !!
    सच कहा मोहब्बत करने वाले तो आज मे ही जीते हैं…………कल तो उनके लिये युगो बराबर होता है।

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  2. आज ही
    जी लेनी है मुझे...
    अपनी सारी उम्र

    वाह ..बहुत खूब ।

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  3. jeena to aaj hi chahiye, kal kabhi nahi aata... uske khwaab ho sakte hain, per hoga to aaj hi

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  4. मुझे कल पर
    जरा भी ऐतबार नहीं !!
    वाह ..बहुत खूब ।

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  5. आज पूनम है
    खूब सारा वक़्त है न तुम्हारे पास
    अब से पहले
    न कभी
    ऐसी पूनम आई
    न कभी
    ऐसा वक़्त
    आज रुकोगे न तुम?

    चाँद से रुकने का भावमय आह्वान भी उसे नहीं रोक पायेगा ..उसके सामने भी उसकी अपनी विवशताएँ हैं ..लेकिन रुकने की प्रार्थना करने का तरीका गजब का है ...शायद चाँद रुक ही जाए ....आपका आभार

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  6. आज पूनम है
    खूब सारा वक़्त है न तुम्हारे पास
    अब से पहले
    न कभी
    ऐसी पूनम आई
    न कभी
    ऐसा वक़्त
    आज रुकोगे न तुम?
    जल्दी मत करना
    आज ही
    जी लेनी है मुझे...
    अपनी सारी उम्र
    मुझे कल पर
    जरा भी ऐतबार नहीं !!

    बहुत खूब.चाँद आज डूबेगा नहीं.शायद कभी भी नहीं डूब पायेगा.

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  7. वाह क्या कहना !

    प्रेमरस में सराबोर ....विह्वल मन की व्याकुल अभिव्यक्ति बहुत ही सुन्दर |

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  8. Sach me kal sirf pachhtaave le k aata h... aaj hi mann ki har baat keh deni chahiye..sundar rachna :)

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  9. भाव मयी करती खुबसूरत रचना...

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