सोमवार, 24 सितंबर 2012

सफ़र

ये रास्ते का संघर्ष
ये पीड़ाएं
ये इंतजारी के दिन
ये प्रतीक्षा की रातें
ये दर्द के आँसू
अहा !
मंज़िल से ज्यादा आनंद तो
सफ़र में है

सुनो मेरी मंज़िल... !
मैंने नहीं पहुँचना
कहीं भी...

-आनंद

5 टिप्‍पणियां:

  1. सफर का ही आननद लीजिये ..... मंज़िल पर पहुँच गए तो बाकी सब कुछ नहीं रहेगा ... सुंदर

    उत्तर देंहटाएं
  2. अहा !
    मंज़िल से ज्यादा आनंद तो
    सफ़र में है
    बहुत खूब।

    उत्तर देंहटाएं
  3. ये शायर भी सच्ची दीवाने होते हैं......

    अनु

    उत्तर देंहटाएं