गुरुवार, 20 सितंबर 2012

टूटता कहाँ है दिल ...

विशुद्ध रासायनिक क्रिया है
दिल का टूटना
देखने में भले ही भौतिकी लगे,

इसमें भौतिक इतना ही होता है कि
किसी को देखने की लत से मजबूर नशेड़ी आँखें
चेहरे से हटकर दिल में फिट हो जाती हैं
फिर
दिल से दिखायी पड़ने लगता है सब कुछ
और पथरा जाती है
चेहरे की आँखें

जरा भी आकस्मिक घटना नहीं है
दिल टूटना
क़तरा-क़तरा करके ज़मींदोज़ होता है कोई ख़्वाब
रेशा-रेशा करके टूटता है एक धागा
लम्हा-लम्हा करके बिखरती है जिंदगी
उखडती है हर बार जड़ों के साथ थोड़ी थोड़ी मिट्टी
टूटने से ठीक पहले तक
टूटता कहाँ है दिल

बुद्धिमानों की दुनिया में
किसी रंगकर्म सा मनोरंजक होता है
दिल का टूटना
आखिर किसी और का प्रेम श्रेष्ठ कैसे हो सकता है
हर मुमकिन कोशिश नीचा साबित करने की
चाहत, आसक्ति, मोह
अज्ञान ... और भी न जाने क्या क्या
हज़ारों बार अनेकों युक्तियों से तोड़ा जाता है इसे
टूटने से ठीक पहले तक
टूटता कहाँ है दिल

महज़ एक कविता नहीं है
दिल का टूटना  
कभी कभी तो लोग टूट जाया करते हैं
टूट जाती है सारी कायनात
हौसले टूट जाते हैं
उम्मीद ... और फिर भरोसा
डूबने से ठीक पहले खूब जोर से नाचती है
भँवर में फँसी कश्ती

टूटने से ठीक पहले तक
टूटता कहाँ है दिल |

- आनंद
१८/०९/२०१२


17 टिप्‍पणियां:

  1. जी हां रासायनिक क्रिया है दिल का टूटना.....
    जाने कौन कौन सी ज़ह्रीली गैसें निकलती हैं...एसिड बन कर जला देता है आत्मा.....और तोड़ने वाला उत्प्रेरक(catalyst) का काम करता है..बचा रहता है वैसा का वैसा(unaffected)
    anu
    M.Sc.CHEMISTRY
    :-)

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  2. कैमिस्ट्री की मिस्ट्री अपनी समझ से बाहर की चीज़ है :(

    टूटने से ठीक पहले तक
    टूटता कहाँ है दिल |

    आखिरी लाइन बहुत कुछ कह देती है।

    सादर

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  3. महज़ एक कविता नहीं है
    दिल का टूटना
    कभी कभी तो लोग टूट जाया करते हैं
    टूट जाती है सारी कायनात
    हौसले टूट जाते हैं
    उम्मीद ... और फिर भरोसा
    डूबने से ठीक पहले खूब जोर से नाचती है
    भँवर में फँसी कश्ती

    टूटने से ठीक पहले तक
    टूटता कहाँ है दिल |
    एकदम सही बात है..
    दिल टूटता है तो सिर्फ दिल ही नहीं
    लोग भी टूट जाते है..उनकी सारी कायनात..उनसे जुड़े लोगो पर भि खूब असर होता है..
    रिअलिस्टिक रचना है..

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  4. दिल के टूटने की क्रिया में ...कुछ ओर टूटे या ना टूटे ...हिम्मत जरुर टूट जाती है

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  5. विशुद्ध रासायनिक किया है..............किया को क्रिया कर लीजिए

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  6. अच्छी केमिस्ट्री है....
    और अगर पहले ही दिल टूट जाये तो...
    फिर कुछ भी नहीं बचता...!!
    :)))

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  7. पहली नज़र में कोई वैज्ञानिक कविता सी लगी... लेकिन प्यार विज्ञान थोड़े न है मनोविज्ञान है...
    ************

    प्यार एक सफ़र है, और सफ़र चलता रहता है...


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  8. कल 23/09/2012 को आपकी यह बेहतरीन पोस्ट http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
    धन्यवाद!

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    From Another Annual Day

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  10. महज़ एक कविता नहीं है
    दिल का टूटना
    कभी कभी तो लोग टूट जाया करते हैं
    टूट जाती है सारी कायनात
    हौसले टूट जाते हैं
    उम्मीद ... और फिर भरोसा
    डूबने से ठीक पहले खूब जोर से नाचती है
    भँवर में फँसी कश्ती

    टूटने से ठीक पहले तक
    टूटता कहाँ है दिल |

    bahut achchhi lagi yah kavita. man udwelit ho gaya padhkar.

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  11. टूटने से ठीक पहले तक
    टूटता कहाँ है दिल |
    ध्रुव सत्य....

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  12. आपका ब्लॉग अच्छा लगा ,दिल की चोट बखूबी से परिभाषित की है आपने ,दरअसल यही तो जीने का सबब होता है हर रिश्ता हर पल साथ नहीं होते भी साथ तो होता ही है | बधाई| मेरे ब्लॉग पर भी आपका स्वागत है |

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  13. hamne college ke dino me pyar karne ki koshish ki thi, aur ek thappar para uske bhiya se:D
    ye to visudhh bhautik pratikriya ho gayee:PPP
    rachna to aapki behtareen hoti hai, uske liye kyaa kahna:)

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  14. टूटने से ठीक पहले तक
    टूटता कहाँ है दिल....सच ही तो है..

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  15. दिल के टूटने की आवाज़ हम तक भी पहुंची जो अकसर बे-आवाज़ होती है।

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  16. दिल कटुताना भी एक रासायनिक क्रिया है .... यह आज ही पता चला ... अच्छी प्रस्तुति

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