मंगलवार, 7 फ़रवरी 2012

अब क्या जबाब दें ...




जो खुद गुलाब है वो हमें  क्या गुलाब दें
इतने हैं लाज़बाब, कि अब  क्या जबाब दें

मुझको हर एक रस्म निभाने का शौक था
कैसे हुए खराब,  कि अब क्या जबाब दें

अहसास की बातों को अहसास ही रहने दें
मत पूछिए जनाब,  कि अब क्या जबाब दें

वो तो कमाल थे ही हम भी कमाल निकले
कैसे कटी शबाब,  कि हम क्या जबाब दें

कितनी मिली मोहब्बत औ कितना दर्द पाया
मत पूछिए हिसाब,  कि अब क्या जबाब दें

यूँ  तो हज़ार  चेहरे  'आनंद'  झांक  आया
सब पर मिली नकाब, कि अब क्या जबाब दें

-आनंद द्विवेदी
७ फरवरी २०१२


30 टिप्‍पणियां:

  1. कितनी मिली मोहब्बत औ कितना दर्द पाया
    मत पूछिए हिसाब, कि अब क्या जबाब दें

    यूँ तो हज़ार चेहरे 'आनंद' झांक आया
    सब पर मिली नकाब, कि अब क्या जबाब दें


    अब नकाब उठाइये.....
    और हुज़ूर का जलवा देखिये.....

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  2. प्रस्तुति अच्छी लगी । मेरे नए पोस्ट पर आपका स्वागत है । धन्यवाद ।

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    1. शुक्रिया प्रेम जी जैसे ही समय मिलता है आता हूँ ..और फिर क्या नया क्या पुराना सभी पढ़ता हूँ आकार.

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    1. कृपया ये पोस्ट आत्माओं के लिए नहीं है :)

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  4. कितनी मिली मोहब्बत औ कितना दर्द पाया

    मत पूछिए हिसाब, कि अब क्या जबाब दें...
    हिसाब किताब रखना भी नहीं चाहिए.गज़ल के कुछ शेर वाकई बहुत अच्छे बन पड़े हैं

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    1. कौन हिसाब किताब रखता है निधि ... मस्त राम हूँ मैं !!

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  5. हम खुद गुलाब है किसी को क्या गुलाब दें
    इतने हैं लाज़बाब, कि अब क्या जबाब दें

    लाज़बाब...

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  6. वाह !!! क्या बात है, आनंद जी बहुत ही शानदार प्रस्तुति मज़ा आगया पढ़कर आभार

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  7. मुझको हर एक रस्म निभाने का शौक था
    कैसे हुए खराब, कि अब क्या जबाब दें ...

    बहुत खूब आनंद जी ... लाजवाब शेर है इस अबर्दस्त गज़ल का ... क्या बात है ..

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  8. कितनी मिली मोहब्बत औ कितना दर्द पाया
    मत पूछिए हिसाब, कि अब क्या जबाब दें

    यूँ तो हज़ार चेहरे 'आनंद' झांक आया
    सब पर मिली नकाब, कि अब क्या जबाब दें


    जनाब...मोहब्बत और दर्द का हिसाब किताब छोड़िये !
    कैसे पलटें उनका नकाब.....आप तो बस यही सोचिये !!

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  9. जनाब...मोहब्बत और दर्द का हिसाब किताब छोड़िये
    कैसे पलटें उनका नकाब.....आप तो बस यही सोचिये

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  10. मुझको हर एक रस्म निभाने का शौक था
    कैसे हुए खराब, कि अब क्या जबाब दें

    बहुत सुंदर आनंद !
    सौम्यता का जवाब नहीं , इस बेहतरीन रचना के लिए आभार भैया !

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    1. सतीश भाई जी आपके आशीर्वाद और प्यार का भी जबाब कहाँ है ! आभार !!

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