शुक्रवार, 9 दिसंबर 2011

मेरा उठना... मेरा बैठना




मेरा उठना
मेरा बैठना 
मेरा बोलना
मेरी मौन 
मेरा हंसना 
मेरा रोना 
सब
तेरी ही तो अभिव्क्ति है
मेरा सारा जीवन
तेरा ही एक गीत है माधव !
इसे मैं जितना
शांत
और शांत होकर सुनता हूँ
तू उतना ही मेरे अंदर
गहरे
और गहरे
नाचने लगता है !!

लोग कहते हैं ....कि
तू
बहुत विराट है ,
"रोम रोम प्रति लागे कोटि कोटि ब्रह्माण्ड "
उफ्फ्फ
मैं तो डर ही जाऊंगा
मेरे से
इतना कहाँ संभलेगा
वैसे भी
मुझे इस तरह कि बातें
जरा भी अच्छी नहीं लगती
मैं जानता हूँ .... कि मैं
तुझे समझ नहीं सकता
(समझना चाहता भी नहीं )
पर मैं
तुझे जी सकता हूँ
जी रहा हूँ मैं
तुझे  !


इधर देख ... वैसे ही प्यार भर कर
और  कर दे ...पागल
अब होश में रहने का
जरा भी मन नहीं !

-आनंद द्विवेदी ९/१२/२०११

25 टिप्‍पणियां:

  1. मेरा सारा जीवन
    तेरा ही एक गीत है माधव !
    sach me...

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  2. वह यदि भाव न खाए तो कोई उसे भाव ही न दे...बहुत सुंदर भावों से सजी कविता !

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  3. It really shows in how you present your thoughts. You have kept your information interesting and original. Your talent for writing is truly amazing.

    From Great talent

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  4. आपकी किसी पोस्ट की चर्चा है नयी पुरानी हलचल पर कल शनिवार 10-12-11. को । कृपया अवश्य पधारें और अपने अमूल्य विचार ज़रूर दें ..!!आभार.

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  5. भावपूर्ण रचना समय मिले कभी तो आयेगा मेरी पोस्ट पर आपका सवाग्त है http://aapki-pasand.blogspot.com/2011/12/blog-post_08.html इसके अलावा एक ब्लॉग और भी है मेरे अनुभव वहाँ भी आपका स्वागत हौ

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  6. एक अलग भाव रख कर कविता लिखने का प्रयोग ....बहुत अच्छा है ...
    खुद में जीना उस गोपाला को याद कर जीना बेहद खूबसूरत है ...जीवन का एक अलग ही रंग है ...

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  7. बहुत खूब. बेहतरीन रचना. आभार.

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  8. प्रथम करें अभिवादन स्वीकृत,बात आपकी सच शत-प्रतिशत।
    कभी आइये ब्लॉग पे मेरे,प्रगट कीजिये अपना अभिमत।
    मेरी रचनायें करती हैं,आप सभी का दिल से स्वागत।
    पक्ष में या प्रतिपक्ष में लिक्खें,सहमत हों या चाह असहमत।
    मेरा लिखना तभी सार्थक,आपकी सोच से जब हूँ अवगत।

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  9. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

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  10. itne bhaav se bhaav khane aur khilane ka maza hi kuch mur hai... bahut hi aanand aat hai...
    "hai na maadhav!!!"

    bahut khoobsoorat...

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  11. मैं जानता हूँ .... कि मैं
    तुझे समझ नहीं सकता
    (समझना चाहता भी नहीं )
    पर मैं
    तुझे जी सकता हूँ
    जी रहा हूँ मैं

    बस और क्या .....!
    इतना ही काफी है....!!

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  12. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

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  13. bahut badi aur gudh baat yahi hai ki...

    तुझे समझ नहीं सकता
    (समझना चाहता भी नहीं )
    पर मैं
    तुझे जी सकता हूँ
    जी रहा हूँ मैं
    तुझे !

    krishn ke vichaar ko jeena adwitye hai aur jivan ki samast shiksha. sundar rachna ke liye badhai.

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  14. तेरी ही तो अभिव्यक्ति है
    मेरा सारा जीवन
    तेरा ही एक गीत है माधव !...बहुत सुन्दर..सही कहा....

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  15. आप सभी मित्रों का हार्दिक आभार !

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  16. इसे मैं जितना
    शांत
    और शांत होकर सुनता हूँ
    तू उतना ही मेरे अंदर
    गहरे
    और गहरे
    नाचने लगता है !!
    Bahut bahut bahut khoobsoorat hai..

    Saadar

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    1. बहुत ही सुन्दर रचना एवं भावो की अभिव्यक्ति है आपकी...

      हटाएं
  17. बहुत ही सुन्दर रचना एवं भावो की अभिव्यक्ति है आपकी...

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