आ जिंदगी तू आज मेरा कर हिसाब कर
या हर जबाब दे, या मुझे लाजबाब कर
मैं इश्क करूंगा हज़ार बार करूंगा
तू जितना कर सके मेरा खाना खराब कर
या छीन ले नज़र कि कोई ख्वाब न पालूं
या एक काम कर कि मेरा सच ये ख्वाब कर
या मयकशी से मेरा कोई वास्ता न रख
या ऐसा नशा दे कि मुझे ही शराब कर
जा चाँद से कह दे कि मेरी छत से न गुजरे
या फिर उसे मेरी नज़र का माहताब कर
क्या जख्म था ये चाक-ए-जिगर कैसे बच गया
कर वक़्त की कटार पर तू और आब कर
खारों पे ही खिला किये है गुल, ये सच है तो
'आनंद' के लिए भी कोई तो गुलाब कर ||
-आनंद द्विवेदी २९-११-२०११

मजधार मेरे काम की नहीं..
प्रत्युत्तर देंहटाएंया इस पार कर या उस पार कर ....!!
सुंदर अभिव्यक्ति ...
खारों पे ही खिला किये है गुल, ये सच है तो
प्रत्युत्तर देंहटाएं'आनंद' के लिए भी कोई तो गुलाब कर ||/
वाह आनंद भाई ...मज़ा आ गया /
आप मेरे ब्लॉग पर बहुत दिनों से नहीं आये हैं
जिंदगी को ही लाजवाब कर दिया है ..
प्रत्युत्तर देंहटाएंचित्र के साथ साथ बहुत ख़ूबसूरत प्रस्तुती!
प्रत्युत्तर देंहटाएंसुन्दर प्रस्तुति के लिए आभार....
आ जिंदगी तू आज मेरा कर हिसाब कर
प्रत्युत्तर देंहटाएंया हर जबाब दे, या मुझे लाजबाब कर
हर पंक्ति में आपने एक फलसफा भर दिया है .....जो सोचने पर मजबूर करता है .....आपका आभार
एक प्रभावशाली ग़ज़ल....
प्रत्युत्तर देंहटाएं"क्या जख्म था ये चाक-ए-जिगर कैसे बच गया
प्रत्युत्तर देंहटाएंकर वक़्त की कटार पर तू और आब कर "
"जा चाँद से कह दे कि मेरी छत से न गुजरे
या फिर उसे मेरी नज़र का माहताब कर"
क्या बात है.....!
इतनी खूबसूरत गज़ल...!!
माशाल्लाह......!!!
बहुत ही उम्दा ग़ज़ल....
प्रत्युत्तर देंहटाएंSabhi sher ek se badhkar ek
प्रत्युत्तर देंहटाएंUmda ghazal.
Badhai.
क्या जख्म था ये चाक-ए-जिगर कैसे बच गया
प्रत्युत्तर देंहटाएंकर वक़्त की कटार पर तू और आब कर
Wah...Bahut Badhiya
अच्छी जवाबतलबी हो गयी जिन्दगी से !
प्रत्युत्तर देंहटाएंuffffff.....itani gahri soch kii jindagi se ladne ko taiyaar ho gaye aap.......kamal ka likha hai
प्रत्युत्तर देंहटाएंआप सभी का ह्रदय से आभार !
प्रत्युत्तर देंहटाएंया छीन ले नज़र कि कोई ख्वाब न पालूं
प्रत्युत्तर देंहटाएंया एक काम कर कि मेरा सच ये ख्वाब कर
बहुत खूब बहुत खूब
जा चाँद से कह दे कि मेरी छत से न गुजरे
प्रत्युत्तर देंहटाएंया फिर उसे मेरी नज़र का माहताब कर
गजब का लिखे हैं सर!
सादर
दीदी कि टिप्पड़ी
प्रत्युत्तर देंहटाएंसंगीता स्वरुप ( गीत ) ने आपकी पोस्ट " आ जिंदगी तू आज मेरा कर हिसाब कर .. " पर एक टिप्पणी छोड़ी है:
आपकी किसी नयी -पुरानी पोस्ट की हल चल आज 01-12 - 2011 को यहाँ भी है
...नयी पुरानी हलचल में आज .उड़ मेरे संग कल्पनाओं के दायरे में
या हर जबाब दे, या मुझे लाजबाब कर
प्रत्युत्तर देंहटाएंबहुत खूब!
जा चाँद से कह दे कि मेरी छत से न गुजरे
प्रत्युत्तर देंहटाएंया फिर उसे मेरी नज़र का माहताब कर
हर शेर लाजवाब है ! किसकी तारीफ़ करूँ किसे छोड़ूँ ! बहुत ही बेहतरीन गज़ल ! बधाई एवं शुभकामनायें !
आज कल न जाने क्या बात है कुछ कमेंट्स मेल में तो आजाते है यहाँ डिस्प्ले नहीं होते...
प्रत्युत्तर देंहटाएंदानिश भाई जी का एक कमेन्ट
daanish ने आपकी पोस्ट " आ जिंदगी तू आज मेरा कर हिसाब कर .. " पर एक टिप्पणी छोड़ी है:
आ ज़िंदगी तू आज मेरा, कर हिसाब कर
वाह.... मतले के इस खूबसूरत मिसरे से ही
ग़ज़ल के मिज़ाज का अंदाज़ा होने लगता है...वाह !
हर शेर अपनी मिसाल आप बन पड़ा है
"या ऐसा नशा दे क मुझे ही शराब कर..."
सूफ़ियाना लहजा,
एक अलग-सी कैफ़ियत की जानिब खींचे लिए जाता है
और
मैं इश्क करूंगा हज़ार बार करूंगा
तू जितना कर सके मेरा खाना खराब कर
ज़िंदगी से मुलाक़ात का यह बहुत कारगर ज़रिया है
मुबारकबाद .
प्रत्युत्तर देंहटाएं♥
आदरणीय आनंद द्विवेदी जी
प्रियवर आनंद जी
अज़ीज़ आनंद बाबू
:)… आपके सृजन और व्यवहार तथा हमारे बीच विशेष संबंध के कारण कई बार आपके लिए संबोधन और अभिवादन के समय मैं धर्मसंकट जैसी स्थिति में आ जाता हूं :) …
आपकी रचनाएं पढ़ता रहता हूं , तब भी जब मेरे कमेंट आप तक नहीं पहुंचा पाता …
प्रस्तुत ग़ज़ल का एक शे'र कोट करते ही मेरा दिल सवाल करेगा कि बाकी अश्'आर से कोई पूर्वाग्रह है क्या ?
… हर शे'र एक से बढ़ कर एक जो हैं
… तो बस ,उपस्थिति दर्ज़ कीजिएगा जनाब !
हार्दिक बधाई और मंगलकामनाओं सहित…
- राजेन्द्र स्वर्णकार
आ जिंदगी तू आज मेरा कर हिसाब कर
प्रत्युत्तर देंहटाएंया हर जबाब दे, या मुझे लाजबाब कर
वाह... क्या ही मतला है...
फिर तमाम अशार भी बीस कहे हैं आपने...
आनंद आ गया...
सादर...
आ जिंदगी तू आज मेरा कर हिसाब कर
प्रत्युत्तर देंहटाएंया हर जबाब दे, या मुझे लाजबाब कर
बहुत खूब ...बेहतरीन पंक्तियां ।
to me
प्रत्युत्तर देंहटाएंवन्दना ने आपकी पोस्ट " आ जिंदगी तू आज मेरा कर हिसाब कर .. " पर एक टिप्पणी छोड़ी है:
आज का आकर्षण बना है आपका ब्लोग है ज़ख्म पर और गर्भनाल पर अपनी पोस्ट देखियेगा और अपने विचारों से
अवगत कराइयेगा । http://redrose-vandana.blogspot.com
आ जिंदगी तू आज मेरा कर हिसाब कर
प्रत्युत्तर देंहटाएंया हर जबाब दे, या मुझे लाजबाब कर ....बेहतरीन पंक्तियां । बहुत सुन्दर भाव..