मंगलवार, 29 नवंबर 2011

आ जिंदगी तू आज मेरा कर हिसाब कर ..



आ जिंदगी तू आज मेरा कर हिसाब कर
या हर जबाब दे मुझे  या लाजबाब कर 

मैं  इश्क  करूंगा  हज़ार  बार करूंगा
तू जितना कर सके मेरा खाना खराब कर

या छीन  ले नज़र कि कोई ख्वाब न पालूं
या एक काम कर कि मेरा सच ये ख्वाब कर

या मयकशी से मेरा कोई वास्ता न रख
या ऐसा नशा दे कि मुझे ही शराब कर 

जा चाँद से कह दे कि मेरी छत से न गुजरे
या फिर उसे मेरी नज़र का माहताब कर

क्या जख्म था ये चाक जिगर कैसे बच गया  
कर वक़्त की कटार पर तू और आब कर

खारों पे ही खिला किये है गुल, ये सच है तो
'आनंद' के ग़मों को ही तू अब  गुलाब कर  |

-आनंद द्विवेदी २९-११-२०११

34 टिप्‍पणियां:

  1. मजधार मेरे काम की नहीं..
    या इस पार कर या उस पार कर ....!!
    सुंदर अभिव्यक्ति ...

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  2. खारों पे ही खिला किये है गुल, ये सच है तो
    'आनंद' के लिए भी कोई तो गुलाब कर ||/
    वाह आनंद भाई ...मज़ा आ गया /
    आप मेरे ब्लॉग पर बहुत दिनों से नहीं आये हैं

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  3. जिंदगी को ही लाजवाब कर दिया है ..

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  4. चित्र के साथ साथ बहुत ख़ूबसूरत प्रस्तुती!
    सुन्दर प्रस्तुति के लिए आभार....

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  5. आ जिंदगी तू आज मेरा कर हिसाब कर
    या हर जबाब दे, या मुझे लाजबाब कर
    कल इस एक शेर से ही अनुमान हो गया था कि गज़ल लाजबाब होने वाली है .
    सभी शेर एक से बढ़कर एक हैं.
    पर
    जा चाँद से कह दे कि मेरी छत से न गुजरे
    या फिर उसे मेरी नज़र का माहताब कर
    और
    खारों पे ही खिला किये है गुल, ये सच है तो
    'आनंद' के लिए भी कोई तो गुलाब कर ||
    जबर्दस्त्त लगे...

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  6. आ जिंदगी तू आज मेरा कर हिसाब कर
    या हर जबाब दे, या मुझे लाजबाब कर

    हर पंक्ति में आपने एक फलसफा भर दिया है .....जो सोचने पर मजबूर करता है .....आपका आभार

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  7. मैं इश्क करूंगा हज़ार बार करूंगा
    तू जितना कर सके मेरा खाना खराब कर

    waah !kya baat hei ....

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  8. "क्या जख्म था ये चाक-ए-जिगर कैसे बच गया
    कर वक़्त की कटार पर तू और आब कर "

    "जा चाँद से कह दे कि मेरी छत से न गुजरे
    या फिर उसे मेरी नज़र का माहताब कर"

    क्या बात है.....!
    इतनी खूबसूरत गज़ल...!!
    माशाल्लाह......!!!

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  9. क्या जख्म था ये चाक-ए-जिगर कैसे बच गया
    कर वक़्त की कटार पर तू और आब कर

    Wah...Bahut Badhiya

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  10. अच्छी जवाबतलबी हो गयी जिन्दगी से !

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  11. uffffff.....itani gahri soch kii jindagi se ladne ko taiyaar ho gaye aap.......kamal ka likha hai

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  12. आप सभी का ह्रदय से आभार !

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  13. या छीन ले नज़र कि कोई ख्वाब न पालूं
    या एक काम कर कि मेरा सच ये ख्वाब कर

    बहुत खूब बहुत खूब

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  14. जा चाँद से कह दे कि मेरी छत से न गुजरे
    या फिर उसे मेरी नज़र का माहताब कर

    गजब का लिखे हैं सर!

    सादर

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  15. दीदी कि टिप्पड़ी
    संगीता स्वरुप ( गीत ) ने आपकी पोस्ट " आ जिंदगी तू आज मेरा कर हिसाब कर .. " पर एक टिप्पणी छोड़ी है:

    आपकी किसी नयी -पुरानी पोस्ट की हल चल आज 01-12 - 2011 को यहाँ भी है

    ...नयी पुरानी हलचल में आज .उड़ मेरे संग कल्पनाओं के दायरे में

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  16. या हर जबाब दे, या मुझे लाजबाब कर
    बहुत खूब!

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  17. आ ज़िंदगी तू आज मेरा, कर हिसाब कर

    वाह.... मतले के इस खूबसूरत मिसरे से ही
    ग़ज़ल के मिज़ाज का अंदाज़ा होने लगता है...वाह !
    हर शेर अपनी मिसाल आप बन पड़ा है
    "या ऐसा नशा दे क मुझे ही शराब कर..."
    सूफ़ियाना लहजा,
    एक अलग-सी कैफ़ियत की जानिब खींचे लिए जाता है
    और
    मैं इश्क करूंगा हज़ार बार करूंगा
    तू जितना कर सके मेरा खाना खराब कर
    ज़िंदगी से मुलाक़ात का यह बहुत कारगर ज़रिया है
    मुबारकबाद .

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  18. जा चाँद से कह दे कि मेरी छत से न गुजरे
    या फिर उसे मेरी नज़र का माहताब कर

    हर शेर लाजवाब है ! किसकी तारीफ़ करूँ किसे छोड़ूँ ! बहुत ही बेहतरीन गज़ल ! बधाई एवं शुभकामनायें !

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  19. आज कल न जाने क्या बात है कुछ कमेंट्स मेल में तो आजाते है यहाँ डिस्प्ले नहीं होते...
    दानिश भाई जी का एक कमेन्ट
    daanish ने आपकी पोस्ट " आ जिंदगी तू आज मेरा कर हिसाब कर .. " पर एक टिप्पणी छोड़ी है:

    आ ज़िंदगी तू आज मेरा, कर हिसाब कर

    वाह.... मतले के इस खूबसूरत मिसरे से ही
    ग़ज़ल के मिज़ाज का अंदाज़ा होने लगता है...वाह !
    हर शेर अपनी मिसाल आप बन पड़ा है
    "या ऐसा नशा दे क मुझे ही शराब कर..."
    सूफ़ियाना लहजा,
    एक अलग-सी कैफ़ियत की जानिब खींचे लिए जाता है
    और
    मैं इश्क करूंगा हज़ार बार करूंगा
    तू जितना कर सके मेरा खाना खराब कर
    ज़िंदगी से मुलाक़ात का यह बहुत कारगर ज़रिया है
    मुबारकबाद .

    उत्तर देंहटाएं





  20. आदरणीय आनंद द्विवेदी जी
    प्रियवर आनंद जी
    अज़ीज़ आनंद बाबू

    :)… आपके सृजन और व्यवहार तथा हमारे बीच विशेष संबंध के कारण कई बार आपके लिए संबोधन और अभिवादन के समय मैं धर्मसंकट जैसी स्थिति में आ जाता हूं :) …

    आपकी रचनाएं पढ़ता रहता हूं , तब भी जब मेरे कमेंट आप तक नहीं पहुंचा पाता …
    प्रस्तुत ग़ज़ल का एक शे'र कोट करते ही मेरा दिल सवाल करेगा कि बाकी अश्'आर से कोई पूर्वाग्रह है क्या ?
    … हर शे'र एक से बढ़ कर एक जो हैं
    … तो बस ,उपस्थिति दर्ज़ कीजिएगा जनाब !

    हार्दिक बधाई और मंगलकामनाओं सहित…
    - राजेन्द्र स्वर्णकार

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  21. आ जिंदगी तू आज मेरा कर हिसाब कर
    या हर जबाब दे, या मुझे लाजबाब कर
    वाह... क्या ही मतला है...
    फिर तमाम अशार भी बीस कहे हैं आपने...
    आनंद आ गया...
    सादर...

    उत्तर देंहटाएं
  22. आज का आकर्षण बना है आपका ब्लोग है ज़ख्म पर और गर्भनाल पर अपनी पोस्ट देखियेगा और अपने विचारों से
    अवगत कराइयेगा । http://redrose-vandana.blogspot.com

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  23. आ जिंदगी तू आज मेरा कर हिसाब कर
    या हर जबाब दे, या मुझे लाजबाब कर
    बहुत खूब ...बेहतरीन पंक्तियां ।

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  24. to me
    वन्दना ने आपकी पोस्ट " आ जिंदगी तू आज मेरा कर हिसाब कर .. " पर एक टिप्पणी छोड़ी है:

    आज का आकर्षण बना है आपका ब्लोग है ज़ख्म पर और गर्भनाल पर अपनी पोस्ट देखियेगा और अपने विचारों से
    अवगत कराइयेगा । http://redrose-vandana.blogspot.com

    उत्तर देंहटाएं
  25. या छीन ले नज़र कि कोई ख्वाब न पालूं
    या एक काम कर कि मेरा सच ये ख्वाब कर

    BEHTAREEN SHER..
    UMDA GAZAL,DWIVEDIJI !

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  26. आप की रचना बड़ी अच्छी लगी और दिल को छु गई
    इतनी सुन्दर रचनाये मैं बड़ी देर से आया हु आपका ब्लॉग पे पहली बार आया हु तो अफ़सोस भी होता है की आपका ब्लॉग पहले क्यों नहीं मिला मुझे बस असे ही लिखते रहिये आपको बहुत बहुत शुभकामनाये
    आप से निवेदन है की आप मेरे ब्लॉग का भी हिस्सा बने और अपने विचारो से अवगत करवाए
    धन्यवाद्
    दिनेश पारीक
    http://dineshpareek19.blogspot.com/
    http://kuchtumkahokuchmekahu.blogspot.com/

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  27. आ जिंदगी तू आज मेरा कर हिसाब कर
    या हर जबाब दे, या मुझे लाजबाब कर ....बेहतरीन पंक्तियां । बहुत सुन्दर भाव..

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  28. बहुत सुंदर ! शुभकामनायें !
    कभी यहाँ भी पधारें

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