रविवार, 25 दिसम्बर 2011

"२०११" ...एक अन्तरंग बातचीत !




प्रिय २०११ !
जा रहे हो न
कभी नही आओगे अब
तुम्हारी तरह के ४३ और वर्ष
जा चुके हैं ऐसे ही
केवल समय के गतिमान होने का
बोध कराते हुए
मगर तुम !
तुमने जो दिया है
जो सौगातें
जो नेमतें
वो अद्वितीय हैं

तुम
बहुत हसीन थे
बहुत शक्तिशाली भी
मगर नियति को बदलने की क्षमता
नही थी तुम में भी

तुमने ही पहली बार बताया कि
खुशबू किसे कहते हैं
हवाएं कैसे गाती हैं
आसमान से गिरती बरसात की बूंदों में
पानी और शराब का अनुपात कितना होता है
तुमने ही बताया कि
जो आनंद पागल होने में है
वो होश में कहाँ ....
और ये भी कि
एक जोड़ी आँखों में
सारी दुनिया कि शराब से
ज्यादा नशा कैसे होता है
और फिर ये भी कि
एक जोड़ी आँखों में ही
एक सागर से ज्यादा
पानी
कैसे आ जाता है !

तुमने जाते जाते
अपना सबसे नायाब तोहफा दिया मुझे ...
फकीरी का
कुछ होने में वो सुख कहाँ
जो 'कुछ न' होने में है
मेरा यह अनुपम आनंद
केवल वही महसूस कर सकता है
जिसके पास........ कुछ न हो
पकड़ने में
वो आनंद कहाँ
जो छोड़ देने में है
पाने में वो मस्ती कहाँ
जो खो देने में है ...!

एक छोटी सी कसक
फिर भी है
तुम हर जाने वाले कि तरह
इतनी हड़बड़ी में क्यों हो
कुछ और ठहरते तो .....?
तुम्हें अच्छे से पता है कि
मुझको .....
इतनी जल्दी
किसी भी बात की
सालगिरह मनाना
जरा भी
अच्छा नही लगेगा !

खैर छोड़ो
मैं तुम्हें पूरे मन से विदाई देता हूँ
अब विदा
हमेशा के लिए !!!

-आनंद द्विवेदी  २५/१२/२०११



  

8 टिप्पणियाँ:

  1. बेनामीDec 25, 2011 04:21 AM

    Really feel pity,first time in forty three years this 2011 gave something for which one was starving, and good god that has gone back too.....good that one realizes the taste of leaving.....that happened.A very contradictory but interesting narration of happenings as one sees for oneself. Impressed !

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  2. बेनामीDec 25, 2011 04:53 AM

    Read Eyes 2010-Goodbye....now read Eyes 2011-goodbye.....ready to welcome Eyes 2012.

    Wishing the best.

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  3. नए वर्ष के आगमन पर पुराने वर्ष की विदाई ... अच्छी प्रस्तुति

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  4. मगर तुम !
    तुमने जो दिया है
    जो सौगातें
    जो नेमतें
    वो अद्वितीय हैं... अच्छी प्रस्तुति

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  5. कुछ होने में वो सुख कहाँ
    जो 'कुछ न' होने में है
    वाह! भक्त हृदय ही लिख सकता है ये पंक्तियाँ...

    इस अन्तरंग बातचीत को कई बार और पढेंगे अभी हम..!

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  6. एक अजीब सी पशोपश से इस साल की बिदाई का आनंद लिया इस कविता में .......प्यार ,जुदाई ...कसक ...सब कुछ पढ़ने को मिला आपकी लेखनी में

    नए साल में नयी उम्मीदों के साथ स्वागत है २०१२ का

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