सोमवार, 25 अप्रैल 2011

कोई शिकवा ही नहीं उसको मुकद्दर के लिये




दो घड़ी भी न मयस्सर हुई ,.. बसर के लिए 
ख्वाब लेकर के मैं आया था उम्र भर के लिए !

कौन जाने कहाँ से, ...  राह दिखादे  दे कोई,
रोज बन-ठन के निकलता हूँ तेरे दर के लिए !

तेरी महफ़िल को,  उजालों की दुआ देता हूँ , 
मैं ही  माकूल नहीं हूँ, ....तेरे शहर के लिए  !

रास्ते  भर,   तेरी यादें ही  काम  आनी  हैं ,
घर में माँ होती तो देती भी कुछ सफ़र के लिए !

दिल को समझाना भी मुस्किल का सबब होता है 
आज फिर जोर से धड़का है  इक नज़र के लिए  !

सिर्फ अहसास  नहीं  हूँ,  वजूद  है  मेरा  ,
मैं बड़े काम का बंदा हूँ किसी घर के लिए  !

अजीब शख्स है 'आनंद', ...फकीरों की तरह ,
कोई शिकवा ही नहीं  उसको मुकद्दर के लिए !

    ---आनंद द्विवेदी २५-०४-२०११

17 टिप्‍पणियां:

  1. तेरी महफ़िल को, उजालों की दुआ देता हूँ ,
    मैं ही माकूल नहीं हूँ, ....तेरे शहर के लिए !

    रास्ते भर, तेरी यादें ही काम आनी हैं ,
    घर में माँ होती तो, देती भी कुछ सफ़र के लिए

    वाह ... बहुत खूब कहा है हर पंक्ति बेमिसाल ...

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  2. बहुत सुन्दर गज़ल्………लाजवाब्।

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  3. सिर्फ अहसास नहीं हूँ, ...... वजूद है मेरा ,
    मैं बड़े काम का बंदा हूँ, अपने घर के लिए

    बहुत सुंदर लिखा है ...!!
    प्रत्येक शेर लाजवाब...!

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  4. दिल को समझाना भी मुस्किल का सबब होता है ,
    आज फिर जोर से धड़का है, ..इक नज़र के लिए !
    dil ko samjhana to waakai bahut mushkil hota hai, ek nazar ke liye dhadak ker phir khamosh hota hai

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  5. 'रास्ते भर, ........... तेरी यादें ही काम आनी हैं
    घर में माँ होती तो,देती भी कुछ सफ़र के लिए '
    *********************************
    वाह द्विवेदी जी ,
    गज़ब की ग़ज़ल प्रस्तुत की है आपने ...हर शेर बोलता है |
    आपकी रचनाधर्मिता सराहनीय है......लेखनी की जय हो !

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  6. 'रास्ते भर, ........... तेरी यादें ही काम आनी हैं
    घर में माँ होती तो,देती भी कुछ सफ़र के लिए '
    *********************************
    वाह द्विवेदी जी ,
    गज़ब की ग़ज़ल प्रस्तुत की है आपने ...हर शेर बोलता है |
    आपकी रचनाधर्मिता सराहनीय है......लेखनी की जय हो !

    उत्तर देंहटाएं
  7. रास्ते भर, तेरी यादें ही काम आनी हैं ,
    घर में माँ होती तो, देती भी कुछ सफ़र के लिए !
    दिल को समझाना भी मुस्किल का सबब होता है ,
    आज फिर जोर से धड़का है, ..इक नज़र के लिए !

    वाह बहुत खूब ....

    आनंद आ गया ......

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  8. रास्ते भर, तेरी यादें ही काम आनी हैं ,
    घर में माँ होती तो, देती भी कुछ सफ़र के लिए !

    एक बार फिर इस शेर के लिए दाद कबूल करें ......

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  9. सिर्फ अहसास नहीं हूँ, ...... वजूद है मेरा ,
    मैं बड़े काम का बंदा हूँ, अपने घर के लिए !
    bahut achche....

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  10. दो घड़ी भी न मयस्सर हुई ,.. बसर के लिए ,
    ख्वाब लेकर के मैं आया था उम्र भर के लिए !bhut hi khubsurat...

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  11. " तेरी महफ़िल को, उजालों की दुआ देता हूँ ,
    मैं ही माकूल नहीं हूँ, ....तेरे शहर के लिए !"


    भावनाओं और सच्चे अहसास के साथ लिखी गयी रचना , अक्सर ह्र्दय में झंकार पैदा करने में समर्थ होती है ! आप अपने मकसद में कामयाब हैं आनंद ....
    हार्दिक शुभकामनायें !

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  12. बेहतरीन ग़ज़ल के लिए मुबारकबाद!!

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  13. anand ki rachne se logo ko anand aa jata hai..yani bhaiya tum safal ho gaye..:)

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  14. 'रास्ते भर, ........... तेरी यादें ही काम आनी हैं
    घर में माँ होती तो,देती भी कुछ सफ़र के लिए
    बहुत सुन्दर भावों से सजी अच्छी रचना|
    आप को हार्दिक शुभ कामनाएं ..

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  15. रास्ते भर, तेरी यादें ही काम आनी हैं ,
    घर में माँ होती तो, देती भी कुछ सफ़र के लिए
    जबर्दस्त्त पंक्तियाँ हैं.

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  16. रास्ते भर, तेरी यादें ही काम आनी हैं ,
    घर में माँ होती तो, देती भी कुछ सफ़र के लिए !

    दिल को समझाना भी मुस्किल का सबब होता है ,
    आज फिर जोर से धड़का है, ..इक नज़र के लिए !

    सिर्फ अहसास नहीं हूँ, ...... वजूद है मेरा ,
    मैं बड़े काम का बंदा हूँ, अपने घर के लिए !

    अजीब शख्स है 'आनंद', ...फकीरों की तरह ,
    कोई शिकवा ही नहीं उसको, ..मुकद्दर के लिए !
    Laajawaab Anand ji Lajawaab..Mukarrar irshaad.

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