मंगलवार, 15 अगस्त 2017

देखेंगे

कुछ दिन बिना सहारे चलकर देखेंगे
खुद को थोड़ा और बदल कर देखेंगे

तुम को तो आता है मुझे सिखा दो ना
हम भी दुनिया भेष बदल कर देखेंगे

सपनों के हत्यारे निर्मम जीवन को
अपने सारे ख़्वाब कुचल कर देखेंगे

सीखेंगे ये हुनर तुम्ही से सीखेंगे
आग लगाकर साफ निकल कर देखेंगे

दर्द बहुत है लेकिन यही तमाशा हम
पंजों के बल उछल उछल कर देखेंगे

हमने भी 'आनंद' गँवाया, तुमने भी
अब क्या होगा खाक़ संभल कर देखेंगे

साँसों के रुकने तक चलना पड़ता है
हम भी सारे छल-बल करके देखेंगे

© आनंद




3 टिप्‍पणियां:

  1. खुद को बदल लिया तो सबसे बड़ा सहारा मिल ही गया..जैसी दृष्टि वैसी सृष्टि..

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