शनिवार, 28 सितंबर 2013

मिट्टी

उसे मिट्टी में ही खेलने दो
हाय राम! तेरा लल्ला तो मिट्टी खाता है
इस मिट्टी की खुशबू ही अलग है
पूरा मिट्टी का माधौ है
इस मिट्टी के लिए भी कुछ सोच
मिट्टी को खून से मत रंग
जाने किस मिट्टी का बना है
मिट्टी का असर जाता कहाँ है

अब क्या बचा है केवल मिट्टी
कब तक इंतजार करोगे मिट्टी खराब हो जाएगी
समय से आ जाते तो मिट्टी मिल जाती
देर कर दी आने में, मिट्टी उठ गयी
मिट्टी है जलने में समय तो लगेगा ही
मिट्टी से लौटकर घर मत आना
मिट्टी में कौन कौन शामिल था
चलो मिट्टी सुधर गयी

मिट्टी मिट्टी में मिल गयी !

- आनंद 

7 टिप्‍पणियां:

  1. नमस्कार आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा कल रविवार (22-09-2013) के चर्चामंच - 1383 पर लिंक की गई है कृपया पधारें. सूचनार्थ

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  2. आपने लिखा....हमने पढ़ा....
    और लोग भी पढ़ें; ...इसलिए आपकी पोस्ट हिंदी ब्लॉगर्स चौपाल में शामिल की गयी और आप की इस प्रविष्टि की चर्चा {रविवार} 29/09/2013 को पीछे कुछ भी नहीं -- हिन्दी ब्लागर्स चौपाल चर्चा : अंक-012 पर लिंक की गयी है। कृपया आप भी पधारें, आपके विचार मेरे लिए "अमोल" होंगें। सादर ....ललित चाहार

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  3. बहुत अच्छी और प्यारी सी रचना

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