गुरुवार, 21 फ़रवरी 2013

केवल प्रेम से मिलते हो..


माधव !
सुना है तुम
केवल प्रेम से मिलते हो..
चाहत से नही..ना ?
तो,
मेरा एक काम करदो
जब तक
मुझे प्रेम ना हो जाए
तब तक
न तो मेरी प्रेम की प्यास मिटे
न ये चाहत...

देख लो!

मुझे
कई जन्म लग सकते हैं ...

- आनंद

3 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत खूब कहा आनन्द मगर जानते हो इसे भी इसी मे मज़ा आता है ………तू तू मै मै करने में , लडने झगडने मे और फिर रूठने मनाने में …………चलो करके देख लो ये भी मगर है बडा निर्मोही कब कैसे छल लेता है पता ही नही चलता ………ज़ानते हो ये जीत कर हारता है

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  2. शुक्क्रिया वंदना जी और प्रतिभा जी !

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