रविवार, 7 अगस्त 2011

मेरा सच !


जैसे पानी का एक बुलबुला  ....
सपना तो
बिलकुल भी नहीं था
था तो हकीकत ही ...
मगर
इन  कमबख्त बुलबुलों की
उम्र ही कितनी होती है
कुछ तो आवाज़  भी नहीं करते ....
मेरा प्यार....
खामोश  बुलबुला  तो नहीं था न ?

_______________________


लगता ही नही
मैंने
जन्नत नही देखी
याकि मैं
इस धरती का
रहने वाला हूँ,
तुमको पाकर
लगता ही नही
कि
मुझमे कुछ कमी है  !



आनन्द द्विवेदी १३-१४/०७/२०११

10 टिप्‍पणियां:

  1. कुछ तो आवाज़ भी नहीं करते ....
    मेरा प्यार....
    खामोश बुलबुला तो नहीं था न ?

    बहुत खूब कहा है ।

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  2. सभी बढ़िया ... दूसरी और अंतिम बहुत बढ़िया ...

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  3. "प्रेमी कभी इतिहास में
    दर्ज नही होते
    वहां केवल बुद्धिमान होते हैं
    प्रेम तो मिट जाने का नाम है
    और तुम में
    वो हिम्मत नही
    बड़ी मुस्किल से पहुंचे हो तुम यहाँ तक
    तुम्हारे लिए
    ज्ञान मार्ग ही ठीक है ||"

    सही कहा है....

    "प्रेम गली अति सांकरी
    यामे दो न समाये "


    प्रेम की गली ही होती है
    जिसमें चलते-चलते चलने वाला गुम हो जाता है..
    और ज्ञान मार्ग पर चलने वाला चलता ही जाता है
    किसी मंजिल के इंतज़ार में...
    किसी निष्कर्ष को पाने की चाह में...
    फिर भी मार्ग ख़त्म नहीं होता
    हाँ !! पगडंडी चलते-चलते कहीं न कहीं गुम ज़रूर हो जाती है..!!
    शायद इसीलिए ज्ञानियों के इतिहास के पन्नों से
    उनको प्रेम करने वालों के नाम नदारत हैं !!

    hats of to you !!

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  4. आपके हर कीड़े की कुलबुलाहट
    कुछ नया ही अनुभव दे जाती है !

    इस कुलबुलाहट को समझने में भी...


    "कई जन्म लग सकते हैं !"

    और किसी का प्यार...

    "खामोश बुलबुला तो नहीं ?"

    भले ही आवाज़ न हो फिर भी
    उसके अस्तित्व से कैसे कोई नकार सकता है...!!

    उत्तर देंहटाएं
  5. आपके हर कीड़े की कुलबुलाहट

    कुछ नया ही अनुभव दे जाती है !
    इस कुलबुलाहट को समझने में भी...

    "कई जन्म लग सकते हैं !"

    और किसी का प्यार

    "खामोश बुलबुला तो नहीं ?"

    भले ही आवाज़ न हो फिर भी
    उसके अस्तित्व से कैसे कोई नकार सकता है...!!

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  6. प्रेम को नये अंदाज में बयाँ करना .......... बेहद अच्छा लगा.

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  7. क्या कहूँ हर बार निशब्द हो जाती हूँ ।

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  8. क्या बात है कोई एक हो तो तारीफ़ की जाये सारी की सारी एक से बढ़ कर एक मगर फ़िर भी मुझे यह बहुत अच्छी लगी...
    लगता ही नही
    मैंने
    जन्नत नही देखी
    याकि मैं
    इस धरती का
    रहने वाला हूँ,
    तुमको पाकर
    लगता ही नही
    कि
    मुझमे कुछ कमी है !

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