शनिवार, 11 जून 2011

प्यार छुपाना मुश्किल है...





सांसों पर पहरे बैठे हैं, कुछ कह पाना मुश्किल है,
दर्द छुपाना आसाँ था पर, प्यार छुपाना मुश्किल है!

नदी किनारे जिस पत्थर पर पहरों बैठे थे हम-तुम,
खुद को भूल गया हूँ लेकिन, उसे भुलाना मुश्किल है!

पीने वाले आँखों के मयखाने से,  पी लेते हैं,
कहने वाले कहते घूमें लाख, जमाना मुश्किल है !

ये उसकी साजिश है कोई, या उसका दीवानापन
मुझसे ही कहता है, तुमसा आशिक़ पाना मुश्किल है!

तुम ही कुछ समझाओ यारों, मेरे इस नादाँ दिल को,
फिर उसको पाने को मचला, जिसको पाना मुश्किल  है !

मेरे दिलबर की दुनिया भी खूब तिलस्मी दुनिया है
आना तो आसाँ है इसमें, वापस जाना मुश्किल है !

जाने उसकी आँखों में क्या बात क़यामत वाली है 
जिससे नज़रें मिल जाएँ, उसका बच पाना मुश्किल है !

मिले कहीं 'आनंद' तुम्हें तो , सुन लेना बातें उसकी ,
सचमुच दीवाना  है वो, उसको समझाना मुश्किल है   !!

    --आनंद द्विवेदी ११-०६-२०११ 

31 टिप्‍पणियां:

  1. ये उसकी साजिश है कोई, या उसका दीवानापन
    मुझसे ही कहता है, तुमसा आशिक़ पाना मुश्किल है!
    बहुत शानदार शेर , दाद काफ़ी नहीं है , मुबारक हो

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  2. मेरे दिलबर की दुनिया भी खूब तिलस्मी दुनिया है
    आना तो आसाँ है इसमें, वापस जाना मुश्किल है !

    प्रेम में ,दर्द में डूबे हुए अल्फाज़ ...
    बहुत सुंदर.

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  3. मेरे दिलबर की दुनिया भी खूब तिलस्मी दुनिया है
    आना तो आसाँ है इसमें, वापस जाना मुश्किल है !


    जाने उसकी आँखों में क्या बात क़यामत वाली है
    जिससे नज़रें मिल जाएँ, उसका बच पाना मुश्किल है !

    प्रेम की इस अभिव्यक्ति को क्या कहें ...जिस में साथ हो कर भी साथ पाना मुश्किल है

    आपका अपने शब्दों पर बहुत अच्छी पकड़ है आनंद जी ....जैसा आप सोचते है ..उस से कहीं अच्छा लिख जाते है
    बहुत खूब

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  4. मेरे दिलबर की दुनिया भी खूब तिलस्मी दुनिया है
    आना तो आसाँ है इसमें, वापस जाना मुश्किल है !


    बहुत खूब ...खूबसूरत गज़ल

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  5. Har sher alag se daad maangtaa hai! Kya gazab gazal kahee hai!

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  6. तुम ही कुछ समझाओ यारों, मेरे इस नादाँ दिल को,
    फिर उसको पाने को मचला, जिसको पाना मुश्किल है !

    मेरे दिलबर की दुनिया भी खूब तिलस्मी दुनिया है
    आना तो आसाँ है इसमें, वापस जाना मुश्किल है !
    bahut hi shaandaar dhang se bahut hi achche bhav liye sher.poori najm hi bahut sunder hai.badhaai.

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  7. तुम ही कुछ समझाओ यारों, मेरे इस नादाँ दिल को,
    फिर उसको पाने को मचला, जिसको पाना मुश्किल है !
    क्या बात कही है आनंद सहब। बहुत खूब।

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  8. "सांसों पर पहरे बैठे हैं, कुछ कह पाना मुश्किल है,
    दर्द छुपाना आसाँ था पर, प्यार छुपाना मुश्किल है!

    पीने वाले आँखों के मयखाने से, पी लेते हैं,
    कहने वाले कहते घूमें लाख, जमाना मुश्किल है !

    ये उसकी साजिश है कोई, या उसका दीवानापन
    मुझसे ही कहता है, तुमसा आशिक़ पाना मुश्किल है!

    मेरे दिलबर की दुनिया भी खूब तिलस्मी दुनिया है
    आना तो आसाँ है इसमें, वापस जाना मुश्किल है !"


    दीवाने,आशिक न जाने कितने होंगे दुनिया में,
    लेकिन सच है बात कि 'आनंद' सा होंना मुश्किल है !!



    क्या बात....!

    क्या बात.....!

    क्या बात.....!

    ***punam***
    bas yun... hi..

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  9. ये उसकी साजिश है कोई, या उसका दीवानापन
    मुझसे ही कहता है, तुमसा आशिक़ पाना मुश्किल है

    बहुत खूब , सरल अभिव्यक्ति के लिए बधाई

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  10. बेहतरीन ग़ज़ल के लिए बहुत बहुत बधाई स्वीकार करें ।

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  11. सांसों पर पहरे बैठे हैं, कुछ कह पाना मुश्किल है,
    दर्द छुपाना आसाँ था पर, प्यार छुपाना मुश्किल है!...........बेहतरीन!

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  12. मेरे दिलबर की दुनिया भी खूब तिलस्मी दुनिया है
    आना तो आसाँ है इसमें, वापस जाना मुश्किल है !

    ...बहुत खूब! लाज़वाब गज़ल..

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  13. आपकी रचनात्मक ,खूबसूरत और भावमयी
    प्रस्तुति भी कल के चर्चा मंच का आकर्षण बनी है
    कल (13-6-2011) के चर्चा मंच पर अपनी पोस्ट
    देखियेगा और अपने विचारों से चर्चामंच पर आकर
    अवगत कराइयेगा और हमारा हौसला बढाइयेगा।

    http://charchamanch.blogspot.com/

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  14. आपकी पोस्ट आज के चर्चा मंच पर प्रस्तुत की गई है
    कृपया पधारें
    चर्चा मंच

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  15. सांसों पर पहरे बैठे हैं, कुछ कह पाना मुश्किल है,
    दर्द छुपाना आसाँ था पर, प्यार छुपाना मुश्किल है!

    नदी किनारे जिस पत्थर पर पहरों बैठे थे हम-तुम,
    खुद को भूल गया हूँ लेकिन, उसे भुलाना मुश्किल है!

    हर पंक्ति बहुत सुन्दर .दिल की तह तक जाती हुई.

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  16. नदी किनारे जिस पत्थर पर पहरों बैठे थे हम-तुम,
    खुद को भूल गया हूँ लेकिन, उसे भुलाना मुश्किल है..यादों को इस तरह भुला पाना सच में मुश्किल है....

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  17. क्या ख़त लिखें रायसुमारी का,पढ़कर अहसास हो गया ..आपकी बेहतरीन नज़्म उत्कृष्ट व् प्रशंसनीय है आभार /

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  18. तुम ही कुछ समझाओ यारों, मेरे इस नादाँ दिल को,
    फिर उसको पाने को मचला, जिसको पाना मुश्किल है !

    अरे वाह!... क्या बात है... बहुत अच्छा... बधाई आनन्द जी

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  19. नदी किनारे जिस पत्थर पर पहरों बैठे थे हम-तुम,
    खुद को भूल गया हूँ लेकिन, उसे भुलाना मुश्किल है..

    वाह ... बेहतरीन प्रस्‍तुति ।

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  20. मेरे दिलबर की दुनिया भी खूब तिलस्मी दुनिया है
    आना तो आसाँ है इसमें, वापस जाना मुश्किल है !



    -बहुत शानदार और उम्दा रचना...बधाई.

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  21. सांसों पर पहरे बैठे हैं, कुछ कह पाना मुश्किल है,
    दर्द छुपाना आसाँ था पर, प्यार छुपाना मुश्किल है.....!बेहतरीन प्रस्‍तुति ।

    उत्तर देंहटाएं
  22. पीने वाले आँखों के मयखाने से, पी लेते हैं,
    कहने वाले कहते घूमें लाख, जमाना मुश्किल है !

    !बेहतरीन !बेहतरीन !बेहतरीन

    उत्तर देंहटाएं
  23. मेरे दिलवर की दुनिया भी खूब तिलस्मी दुनिया है

    आना तो आसां है इसमें , वापस जाना मुश्किल है

    ...................वाह द्विवेदी जी ...ग़ज़ल का हर शेर खुद बखुद बयां हो रहा है

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  24. जाने उसकी आँखों में क्या बात क़यामत वाली है
    जिससे नज़रें मिल जाएँ, उसका बच पाना मुश्किल है !

    वाह !!

    उत्तर देंहटाएं
  25. ये उसकी साजिश है कोई, या उसका दीवानापन
    मुझसे ही कहता है, तुमसा आशिक़ पाना मुश्किल है!

    Confusion resolved. Good read.

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