रविवार, 3 सितंबर 2017

मेरे अपने

वाह भाई वाह,
ऐसे कैसे कह दूँ कि कोई नहीं है मेरा
भगवान ने दो हाथ पैर दिए हैं
वो भी सलामत,
एक पूरी दुनिया है
(वो दीगर बात है कि बिना तुम्हारे ये दुनिया बेकार लगे...पर है तो)
रिश्ते नाते हैं
(वो दीगर बात है कि बिना तुम्हारे सारे नाते केवल माँग और पूर्ति के नियम की श्रंखला भर हैं... पर हैं तो)
ख़्वाब हैं
(वो बात दीगर है कि तुम्हें पास से छूकर देखने का पहला ख़्वाब आज तक अधूरा है...पर है तो)
आँखें हैं
(वो बात दीगर है कि आँखें खुशियों के नन्हे जुगुनू समेटने की जगह खारे पानी का बेमतलब झरना भर हैं... पर हैं तो)
आँसुओं से अच्छा याद आया
अपने तो सिर्फ़ आँसू हैं,
उतना ही तुम्हें देखकर छलकते हैं 
जितना न देखकर
राम जाने कैसे रह लेते हैं
ग़म और ख़ुशी दोनों के एक से वफ़ादार
काश मैं इनसे सीख पाता कोई सबक ...

काश आँसुओं से भरी अपनी आँखें
मैं
चूम पाता एक बार !

© आनंद

1 टिप्पणी:

  1. ब्लॉग बुलेटिन की आज की बुलेटिन, सच्चा सम्मान - ब्लॉग बुलेटिन “ , मे आप की पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

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