मंगलवार, 28 जनवरी 2014

प्रेम

जो प्रेम का नाम लेते हैं,
दुहाई देते हैं,
प्रेम की महिमा का बखान करते हैं
पा लेना चाहते हैं
कुछ न कुछ
किसी न किसी बहाने
मैं वही हतभाग्य हूँ

ईश्वर और प्रेम
एक हैं
एक ही है
इन तक पहुँचने का तरीका
अकारण ... बिना हेतु
'सम्पूर्ण समर्पण' !

- आनंद 

6 टिप्‍पणियां:

  1. ईश्वर और प्रेम कि बहुत ही सुन्दर प्रस्तुति, धन्यबाद।

    एक बार यहाँ भी आयें और अवलोकन करें, धन्यबाद।
    भूली-बिसरी यादें

    उत्तर देंहटाएं
  2. बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति..

    उत्तर देंहटाएं
  3. काफी उम्दा रचना....बधाई...
    नयी रचना
    "सफर"
    आभार

    उत्तर देंहटाएं
  4. कुछ पाने की इच्छा ही प्रेम से दूर कर देती है...ईश्वर और प्रेम के साथ मृत्यु भी पर्यायवाची है..मन की मृत्यु !

    उत्तर देंहटाएं