मंगलवार, 31 दिसंबर 2013

इंतजार

मैं विदा नहीं करता किसी को भी
चले जाते हैं सब के सब
अपने आप ही,
अपने स्वयं के जाने तक
मुझे देखना है बस सबका
आना और आकर चला जाना

इस उम्मीद में हूँ कि
शायद कोई ठहरे
पूछे
कि कैसे हो,
कोई कहे
कि आओ साथ चलें,  
मगर एक इंतजार के सिवा
कोई ठिठकता भी नहीं अब पास

इंतजार कुछ कहता नहीं
मैं भी कुछ पूछता नहीं,
हम दोनों हैं
मौन,
एक दूसरे से ऊबे हुए
एक दूसरे के साथ को अभिशप्त !

 - आनंद

6 टिप्‍पणियां:

  1. "चले जाते हैं सब के सब
    अपने आप ही"...

    कष्टकर ही सही... सत्य तो यही है...

    आपकी लेखनी ने जैसे मेरे ही मन के भाव को लिख दिया हो...
    सच, कोई नहीं ठहरता... कोई नहीं पूछता... कैसे हो?
    ***
    आनंद भैया,
    प्रणाम!

    यूँ ही भावों को विस्तार देते हुए आपकी प्रतिभाशाली कलम चलती रहे...!
    अनंत शुभकामनाएं...

    -अनुपमा

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  2. इंतजार अभी उबाता है उस दिन का करें इंतजार जब वह लुभाएगा...

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  3. जाने वाले को आज तक कौन रोक पाया है

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