गुरुवार, 12 सितंबर 2013

बेईमानी

बात चाहे खेल की हो
या जंग की
अब ये लगभग निश्चित है कि
जीतना तुझे ही है …. जिंदगी !
वैसे भी जो तेरे लिए खेल है
वही मेरे लिए जंग
मैं इस खेल में हूँ ही इसलिए
तेरी जीत जीत लगे
मेरा समर्पण  या पलायन
तुझे वंचित कर देगा
जीत के सुख से
इसलिए हार निश्चित जानते हुए भी
बने रहना है इस खेल में
बचपन में लुकाछिपी खेलने के दौरान
सीखी गयी बेईमानी
अब, बड़े काम आ रही है !

- आनंद



1 टिप्पणी:

  1. वाह !
    जिन्दगी ही तो मात्र खुद की है.. हारने की क्या कहें जो मरकर भी साथ निभाती है.

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