सोमवार, 12 अगस्त 2013

निगोड़ी दुनिया ......!

आजकल सड़कों का सारा ट्रेफिक गायब है
होगा भी तो हमें नहीं मिलता
किसी के कुछ कहने से पहले ही मुस्करा पड़ता हूँ
कभी बहस नहीं करता किसी से
बल्कि मेरी बेफ़िक्री पर अब औरों को गुस्सा आता है
दुनिया का हर काम मेरी रूचि का हो गया है
हर इन्सान प्यारा लगता है
हर वक़्त प्यारा लगता है
हर जगह प्यारी लगती है
ये वही आसमान है न
जो आग का समंदर लगता था
अचानक तारों की जगह इतने सारे फूल ...
इतनी खुशबू  ...

मुझे कुछ नहीं हुआ है
कुछ हो गया है तो बस इस दुनिया को
निगोड़ी एकदम से बदल गयी है !

- आनंद 

3 टिप्‍पणियां:

  1. भावो को खुबसूरत शब्द दिए है अपने.....

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  2. दुनिया के साथ साथ ....आप और हम भी बदल गए

    स्‍वतंत्रता दि‍वस की शुभकामनाएँ

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  3. या तो इश्क है, या ’अल्ज़ाइमर’ :-)!
    सुन्दर भाव, सकारात्मक व प्रेरक!

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