रविवार, 29 अप्रैल 2012

जब भी किसी के प्यार में होती हैं लड़कियां







मुस्किल से, जरा देर को सोती हैं लड़कियां
जब भी किसी के प्यार में होती हैं लड़कियां

'पापा' को कोई रंज न हो, बस ये सोंचकर,
अपनी हयात ग़म में डुबोती हैं लड़कियां

फूलों की तरह खुशबू बिखेरें सुबह से शाम
किस्मत भी गुलों सी लिए होती हैं लड़कियां

'उनमें'...किसी मशीन में, इतना ही फर्क है
सूने  में  बड़े  जोर  से,  रोती  हैं  लड़कियां

टुकड़ों में बांटकर कभी,  खुद को निहारिये
फिर कहिये, किसी की नही होती हैं लड़कियां

फूलों का हार हो,  कभी बाँहों का हार हो
धागे की जगह खुद को पिरोती हैं लड़कियां

'आनंद' अगर अपने तजुर्बे  कि  कहे तो
फौलाद हैं,  फौलाद ही होती हैं लड़कियां

-आनंद द्विवेदी
२९ अप्रेल २०१२


14 टिप्‍पणियां:

  1. ऐसी ही होती हैं प्यारी लड़कियां.. आपने उन्हें फूल भी कहा और फौलाद भी.. उनका व्यक्तित्व इतना ही विस्तृत होता है।

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  2. Wah antim panktiyan mein to puri kavita ko aur prabhavshali bana diya...bahut khub

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  3. सही परखा है लड़कियों को..
    'उनमें'...किसी मशीन में, इतना ही फर्क है,
    सूने में बड़े जोर से, रोती हैं लड़कियां |
    जबर्दस्त्त.

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  4. सच में यह लडकियां .....हर एक अहसास को बखूबी शब्दों में बांधा है आपने ..!

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  5. वाह ! फौलाद सी इन लड़कियों को सलाम !

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  6. बेहतरीन भाव संयोजन से सजी बेहद उम्दा पोस्ट आभार ...

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  8. लड़की बिना सूना घर आँगन ,
    सूना ये संसार हैं,
    हो अवगुण तो बुरी लागे ,
    पर हैं गुणों की खान ये ||....अनु

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  9. लड़कियों का अपना महत्त्व है आपने बहुत गहन अध्यन किया है लड़कियों के स्वभाव का |बहुत बहुत सुन्दर प्रस्तुति |
    आशा

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  10. आप सभी मित्रों का हार्दिक आभार !

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