मंगलवार, 8 फ़रवरी 2011

मैं ही मिला हूँ उससे गुनहगार की तरह


उसने तो किया प्यार मुझे 'प्यार' की तरह,
मैं ही मिला हूँ उससे गुनहगार की तरह !

कुछ  बेबसी  ने  मेरे  पांव  बाँध  दिए थे,
कुछ मैं भी खड़ा ही रहा दीवार की तरह !

इस दिल में सब दफ़न है चाहत भी आरजू भी ,
मत खोदिये मुझे, किसी मज़ार  की तरह !

देने को कुछ नही था मिलता मुझे कहाँ से
दुनिया के क़ायदे हैं, बाज़ार की  तरह  !

खारों पे ही खिला किये हैं गुल ये सोंचकर,
मैं जिंदगी को जी रहा हूँ खार की तरह  !

खामोश निगाहों की तहरीर पढ़ सको तो,
'आनंद' भी मिलेगा तुम्हे यार की तरह !!

2 टिप्‍पणियां:

  1. कुछ बेबसी ने मेरे पांव बाँध दिए थे,
    कुछ मैं भी खड़ा ही रहा दीवार की तरह !

    इस दिल में सब दफ़न है चाहत भी आरजू भी ,
    मत खोदिये मुझे, किसी मज़ार की तरह !

    देने को कुछ नही था मिलता मुझे कहाँ से?
    दुनिया के कायदे हैं, बाज़ार की तरह !

    ufff kya kahun ek ek sher dil ki gehrayon ko chhoota chala gaya.
    bahut kuchh apna sa laga.

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  2. शेर तभी अच्छा लगता है जब अपना सा हो ....धन्यवाद नीलम जी !

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