सुख दुःख से उबरेगी रे
तब रंगत निखरेगी रे
दुलहन नैहर आई तो है
कितने दिन ठहरेगी रे
पिय की भुवनमोहिनी चितवन
दिल में कब उतरेगी रे
छह रूपों वाली इक सौतन
घर से कब निकरेगी रे
सबसे दिल की कह देने की
आदत कब सुधरेगी रे
मतलब के हर रिश्ते वाली
दुनिया कब बिसरेगी रे
सारे दाँव लगे हैं जिस पर
काया यहीं जरेगी रे
ये आनंद नहीं, नाटक है
नटिनी खेल करेगी रे
सब छूटेगा, जिस दिन डोली
पिय के घर उतरेगी रे ।।
© आनंद द्विवेदी
आहा अति सुंदर रचना।
जवाब देंहटाएंजीवन मोह से कौन बच पाया है
सब यहीं रह जाना है यह जानकार
भी किसने क्या न जुटाया है?
सादर
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जी नमस्ते,
आपकी लिखी रचना शुक्रवार २२ मई २०२६ के लिए साझा की गयी है
पांच लिंकों का आनंद पर...
आप भी सादर आमंत्रित हैं।
सादर
धन्यवाद।
सबसे दिल की कह देने की
जवाब देंहटाएंआदत कब सुधरेगी रे
सुंदर रचना
आभार
वंदन
वाह!! नटिनी चाहे सुधरे या न सुधरे क्या फ़र्क़ पड़ता है, जब सब नाटक ही है
जवाब देंहटाएंउतर गई दिल में
जवाब देंहटाएंWahhh ❤️
बहुत सुंदर
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